ये
बरसात की रात,
धरती
के सीने पर पड़ती,
पानी
की बूंदों की आवाज़,
बादल
की गड़गड़ाहट,
आसमान
से चलते बिजली के तीर,
खिड़की
पर खड़ी एक शर्माती लड़की,
कॉफ़ी
ले कर आता हुआ एक नौजवान,
इश्क़
की भोर में कसमसाते दो दिल,
घड़ी
की सुई से सुर मिलती धड़कन,
खामोशी
का आलम,
कॉफ़ी
का घुट भरते हुए उनके थिरकते
होंठ,
अंधेरे
में झांकती चार आंखें,
मन
मे दौड़ते हुए ख्याल,
नौजवान
हिम्मत जुटा कर पूछता है
“कॉफी
कैसी बनी”
लड़की
हल्के स्वर में जवाब देती है
“अच्छी”
खिडकी
के किनारो पर खड़े होकर,
दोनों
चुपचाप कॉफी खत्म करते है,
लड़का
अपना हाथ से बारिश के साथ खेलते
हुए पूछता है,
लड़का
पूछता है “तुमको
बारिश अच्छी लगती है”
लड़की
कहती है “हाँ”
और
पूछती “तुमको”
लड़का
“नही
पर आज अच्छी लग रही है”
लड़की
शर्मा के पूछती “क्यों”
लड़का
“क्योंकि
आज बारिश बातें कर रही है”
लड़की
फिर शर्माती और पूछती “कैसे”
लड़का
उसकी तरफ इशारा करके बोलता
“ऐसे”
बादल
घड़घड़ाने लगे तो लड़के ने
पूछा
“तुम्हे
डर नही लगता इस आवाज़ से”
लड़की
बोलती “लगता
है पर आज नही लग रहा”
लड़का
पूछता “क्यों”
लड़की
कहती “शायद
तुम साथ हो इसलिए”
दोनों
ही मंद मंद हँसने लगते है ।
दोनों
के मन में भावनाये उफान पर
है,
प्यार
अंगड़ाइयां ले रहा है,
कितने
दिनों बाद मिलेे है दोनों,
बचपन
मे घर-घर
खेलते थे,
और
पति –
पत्नी
बनते थे,
तभी
इस चाहत का अंकुर फूटा था,
वक़्त
के थपेड़ों ने उन्हें दूर तो
कर दिया,
पर
उस नन्हे बीज को मधुर यादें
सींचती रही,
इसलिए
इतना समय बीतने के बाद भी लगता
है,
जैसे
कल ही का वाक्या हो,
इस
मासूम सी प्रेम कहानी की
टोह,
उनके
घरवालों को थी,
तभी
तो दोनों का रिश्ता जोड़ने को
मिले है आज,
उस
अधूरी कहानी को पूरी करने,
और
पुरानी दोस्ती को रिश्तेदारी
में बदलने |









