कोई नंबर देखता हूँ तो section याद आता है
बिजली के खंबे पर 440 देख 220 याद आता है
फिर DC का pending नंबर याद आने पर मन घबराता है
बच्चे को गिनती जब सिखाई
7, 9, 10 आते ही
उसे CIRP की शुरुआत समझायी
मंदिर में ललित कुमार जैन नाम देख
PG के मोरेटोरियम का misuse सताता है
Gift wrap का ribbon देख
swiss ribbons का ratio याद आता है
अधूरी इमारत देख
homebuyer की पीढ़ा मन को चुभती है
तो अखबारो में balance sheet देख
सुख की अनुभूति होती है
loan का poster देख
NESL में इसका रजिस्ट्रेशन याद आता है
AC की सर्विस कराते हुए FC और OC याद आए
तो फूफा मुझे PUFE की याद दिलाए
बूढ़े माँ- बाप suspended director से दिखते है
तो बच्चे successful resolution applicant लगते है
बीवी की kitty COC लगती है
जिसमे पत्नी RP है
तो मैं वो related FC हूँ
जिसका COC में कोई वोट नहीं है
एक चुप सा रहने वाला दोस्त OC लगता है
और हर बात काटने वाला dissenting FC लगता है
grocery की list देख
claim की list याद आती है
सब्ज़ियो का रेट देख
avocado का voting share
कम करने की बात आती है
IBBI से बीवी तो आती है
पर घर late जाने पर
investigation हो जाती है
फिर बिना गलती किए माफ़ी मांगने पर
voluntary liquidation जैसी feeling आती है
croma में सामान देखकर लगता है
जैसे auction हो रहा हो
पर अपनी जेब देखकर लगता है
जैसे मेरा liquidation हो गया हो
Sunday को भी काम करने पर बीवी टोकती है
तो यही निकलता है –
CIRP is a time bound process !







