ऊंची इमारत के दड़बों में छुपे,
उस चेहरे को चॉल में रहने वाले,
सुदर्शन ने पहचान लिया था,
स्कूल बस, ट्यूशन क्लास, डांस क्लास,
सब का टाइम उसे अच्छे से पता था,
जब वो बंक मरती थी ,
उसे वो मॉल और थिएटर भी पता था,
उसके दोस्त, दीवाने, बॉयफ्रेंड,
उनका का भी पता मालूम था,
चॉल में सबको, पर बिल्डिंग में किसी को,
नही मालूम था इस प्रेम कहानी का,
आज का था क्या ये प्यार,
जब से उसने रात को 11 बजे,
सिगरेट पीना शुरू किया,
उस दिन से ही सुदर्शन,
अपने चक्र में फंस गया था,
शिउली को पता भी नही था ,
की मोहल्ले की हर दुकान में ,
उसे क्यों डिस्काउंट मिलता था,
उसकी मम्मी भी
हैरान रह जाती थी,
पेंटिंग का शौक़ था सुदर्शन को,
पर अभी वो दीवारें ही पेंट करता था,
शिउली की तस्वीर बना कर ही
पहचान हुई थी दोनों में ,
उसने बिल्डिंग में उसके घर से ही,
पेंट का काम शुरू किया था,
स्टफ देने के बहाने उनमे पहचान बढ़ी,
इसी बहाने उसके दोस्तों से भी पहचान हुई,
करीबी से खुश था सुदर्शन,
शिउली की शादी तय हुई,
उसके बचपन के प्यार से,
माशूका की ख़ुशी के लिए,
उसने इज़हार-ऐ-इश्क़ भी नही किया,
अब वो उसके नए कमरे में पेंट करने लगा,
यही ख़ुशी रही उसे
की शिउली उसी बिल्डिंग में रहेगी,
अचानक से उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया,
उसके फेफड़ो में कैंसर आया,
ज़्यादा दिन नही थे उसके पास,
फिर एक दिन वो चली गयी,
सुदर्शन रोया बहुत,
शायद फूल के तरह,
उसकी महक एक रात की थी,
वो रात और लंबी हो जाती..
उसने नशा और रंगाई छोड़,
पेंटिंग का काम शुरू किया,
पहला पोस्टर ‘No Smoking’ का बनवाया,
और उसे सबसे पहले लगाया
माशूका के दरवाजे पर,






