भवानी राम की चिट्ठी आ गई थी
उसे मेरठ से आगरा तबादला कर दिया था
रुकवाने की अर्ज़ी डाली
पिताजी ने एक मंत्री से भी बात की
चिट्ठी में चिठ्ठी के मिलने के पंद्रह दिन में आगरा पहुंचना था
भवानी राम इंतज़ार में था की इन पंद्रह दिनों में
उसका तबादला रुक जाए
क्यूँकि उसकी शादी थी एक महीने में
नई बहू के साथ नई जगह गृहस्थी जमाना आसान नहीं होगा
ये उसे मालूम था
इसलिए तबादले के रुकवाने के लिए बेचैन था
पंद्रह दिन गुज़र गए
कोई चिट्ठी नहीं आई
भवानी राम को आगरा जाना पड़ा
उसके जाते ही दो चिट्ठी आई
मेरठ वाले दफ्तर में
तो सहकर्मियों ने उत्सुकता से दोनों खोली
की पता नहीं किसमें तबादला रुक गया हो
पर पहली चिट्टी सोनसी की थी
उसकी होने वाली पत्नी
इत्र की ख़ुशबू भी आ रही थी
इस ख़ुशबू में वो सब तबादला वैगरह भूल गए
और चिट्ठी पढ़ने लगे
उसमे बहुत सारी प्यार भरी बातें लिखी थी
“की आपका पिछली चिठ्ठी मिली
उसे पढ़ कर रोम रोम खिल उठा
आप बहुत नटखट है !
(चिठ्ठी के वही अंश पढ़े जा रहे है
जो पढ़े जा सकते है,
सारी बातें यहाँ पब्लिक में बताना उचित नहीं )
मैं भी आपके लिए बहुत कुछ सीख रही हूँ
ऑफिस से आपके आने इंतज़ार करना भी
शाम को अलग अलग तरह के शरबत बनाना भी सीख रही हूँ
पर अभी तो मुझे बस आपकी बारात का इंतज़ार है
घोड़े पर बैठे आप राजा लगेंगे
और मूछों में रौबदार
बस डर रही हूँ की ये मुछे कितना चुभेगी
कम से कम आप दाढ़ी तो नहीं रखते
आप तबादले की ज़्यादा चिंता न करे
मैं पूरा घर संभाल लुंगी
और हम दोनों ही होंगे
तो गृहस्थी भी सीमित होगी
इतना क्या परेशान होना
हम रोज़ ताज महल देखने जाया करेंगे
उसी खिड़की से ताज महल देखेंगे
जिस से शाहजहां देखता था
आप लाल किले पर रहना
मैं ताज महल में रहूँगी
रात की चाँदनी में ताज देखेंगे
जहाँ एक तरफ़ यमुना में
ताज महल की परछाई होगी
दूसरी तरफ़ हमारी
मैं रोज़ नए नए व्यंजन बना कर आपको खिलाऊँगी
आप बोर ही नहीं हों पाया करोगे
अगली चिठ्ठी में बताना की क्या रहा”
ये पढ़ने में दफ्तर वालो को खूब मज़ा आया
फिर दूसरी चिट्ठी खोली तो पता लगा की तबादला रुक गया है
वो चिट्ठी दस दिन देर से आयी थी
उन्होंने दोनों चिट्ठी आगरा भेज दी
भवानी राम आगरा के दफ़्तर पहुँचे
बेमन से कुर्सी पर बैठे हुए थे
न तबादला हुआ न सोनसी की चिठ्ठी आई
मुंह लटक कर मुमताज़ की कब्र तक पहुँच गया था
और रुके हुए आंसुओं का वेग
भाकरा-नागल डैम के पानी की तरह था
जॉइन किए दस दिन हो गये थे
शादी की छुट्टी के लिए फिर मेरठ जाना का दिन आ गया
इतना लटका हुआ चेहरा देख बाबू ने भी जाने दिया
उसके जाते ही अगले दिन दोनों चिट्ठी आगरा पहुँची
उत्साह में फिर दोनों चिट्ठी खोली गई
की कौनसी तबादले की है
फिर उन्होंने सोनसी की चिठ्ठी पढ़ी
और मज़े लिए
उन्होंने दोनों चिठ्ठी इस बार
भवानी राम के घर भेज दी
शादी पाँच दिन बाद थी
चिट्ठियाँ नहीं पहुँची
पर आगरा और मेरठ के दफ़्तर वाले शादी में पहुँच गए
उन्होंने भवानी राम से कहा
“की भाई दाढ़ी मत रखता
और मुछें रखना पर बहुत पैनी नहीं
चाहो तो तबादला ले ही लो
क्यूंकि भाभीजी को ताज महल घूमना है”
उसे कुछ समझ नहीं आया
शादी हो गई पर तबादले रुकने की चिट्ठी नहीं पहुचीं
न ही सोनसी की, जिसका जवाब देना था
अब चिट्ठियों का तो ऐसा ही है
इतनी देर से आती है
की कभी कभी तो बच्चे हो जाते है
लोग retire हो जाते है
पर चिट्ठियाँ नहीं पहुँचती