
Open mic एक भेल की तरह है
थोड़ा खट्टा , थोड़ा मीठा
और थोड़ा तीखा
Creative feathers हुआ डोंगा , भेल बनाने का
पहले steel का था
अब ये काँच का हो गया है
चमकता हुआ
चटनीयाँ है इसकी है audience
जिनके बिना ये भेल अधूरी है
खट्टी चटनी हुई अखिल सर जैसी टिपण्णीयाँ
मीठे चटनी वो लोग जो
तालियाँ बजाते है ,
चुटकियाँ चिटकाते है
गाने गुनगुनाते है और
इसके सुरूर में खो जाते है
इसमें singers तो हुए मुरमुरे या मूडी
जिसके बिना भेल का कोई अस्तित्व ही नहीं है
आजकल मखाना भी डलने लगा है
उसे हम western singers समझ लेते है
उनका english नाम किसी rock band जैसा ही है
FOXNUT
इनमें कुडमूड़ की आवाज़ देती है पापड़ी और बूंदी
यानी के musical instrument
जैसे guitar, violin, keyboard, flute, harmonica
फिर इसमें डालता है सलाद
जैसे प्याज़, टमाटर, उबला आलू, खीरा, कच्ची अम्बी
ये हुए यहाँ के विभिन्न रस के कवि
जो की अपने में भी संपन्न है
या सलाद की जुगलबंदी में भी
ये ही रूमानीयत और रुहिन्यत देते है
मतलब healthy बनाते है
चटकारे के लिए डलता है नींबू और चाट मसाला
यानी के standup comedian
जो कम समय में ज़्यादा असर दिखाते है
और देर तक जुबान रह जाते है
हरि मिर्च भी डालती है इसमें
जो तीखी होती है
यानी की roast comedy
decoration के लिये डालते है
हरा धनिया, बारीक सेव, अनार
ये हुए सच्ची झूठी किस्से कहानियाँ
कभी performance से पहले
कभी उसके बाद , कभी बीच में
और इस भेल की चम्मच है सर्वेश सर
जिससे हम लोग इसे बारी बारी खाते है
मतलब performance देखते है
पर भेल के साथ एक असमंजस की स्थिति भी बनती है
ये जो coffee की ख़ुशबू
हमारी नाक के साथ खिलवाड़ करती है
मन में तरेंगे उत्पन्न करती है
की यार एक तो ले लेते है
भेल के साथ कोई sandwich
या taco भी try कर लेते है
ये भेल हमारी भुख को और बढ़ावा देती है
हर हफ़्ते ये भेल बनती है
चटनी, मसाले, सलाद ऊपर नीचे होते रहते है
पर हर बार मजेदार बनती है
आज बावनवी भेल है
हम यही चाहेंगे की
आगे भी ये भेल हर हफ़्ते बने
सबको खट्टे मीठे चटकारे देती रहे





