गहरी सोच में डूबा था मेरा मन,
कानो में पड़ी पायल की खन खन,
उत्सुक होकर मैंने आवाज़ का पीछा किया,
और उस नज़ारे को देख मैं दंग रह गया,
एक प्यारी सी दुल्हन आ रही थी,
उसकी मुस्कान गज़ब ढा रही थी,
लहंगे ने रंगों का ऐसा उत्सव मनाया,
जरी की चांदनी ने सबका मन भाया,
स्वर्ग की अप्सरा सा था उसका रूप,
मन को मेरे किया उसने अविभूत,
माहौल खुशियों से इस तरह भर गया,
वो पल हमेशा के लिए चित्त में घर कर गया ।।




