
तूफान वायु के वेग में ही नहीं होता
ये होता है लक्ष्य ताकती आँखो में
जैसे एक खिलाड़ी
जिसने olympic में gold medal लाने की ठान ली हो
तूफ़ान उसके पसीने से सनी बनियान में है
body cramps से लाल हुए शरीर में है
volini spray की ख़ाली बोतलों में है
या एक सिपाही के देशभक्ति के जज़्बे में
जो पहाड़ी को अंधेरे में चढ़कर दुश्मन को मारने चला हो
तूफ़ान उसके रिसते घावों में है
जिसे वो नज़रंदाज़ कर आगे बढ़े चला जा रहा है
उन गोलियों के भार में है
जो उसने खाने की जगह रखी है
या एक विद्यार्थी की मेज़ कुर्सी में
जिसने कोई entrance exam निकालने का दम लिया हो
तूफ़ान उसकी भरी हुई कापियों में है
किताबों के इमारतों में है
और ख़त्म हुई pen की refill के ढेर में है
या एक entrepreneur की सादगी में
जिसने अपने वापस जाने के सारे रास्ते बंद कर
खुद को पूरी तरह business में झोंक दिया हो
तूफ़ान उसके और उसके परिवार की खर्चो की कटौती में है
उसके स्वाभिमान की चोट में है ,
जो दफ़्तर खोल ज़मीन पर पौछा मार कर ,
पालथी मार कर काम कर रही है
या एक लड़की के weight loss goal में
जिसे मोटी कह कर लड़के वालो में reject किया हो
तूफ़ान मन मार कर रोज़ gym जाने में है
मिठाई और बर्गर देखकर भी protein shake पीने में है
उस pencil skirt को देखती ललचाती आँखो में है
तूफ़ान रोज तड़के उठने में है
एक ही routine दोहराने में है, discipline में है
नींद से भारी आँखो में भरे अधूरे सपनों में है
शौक और ज़ुबान की ललक को क़ाबू करने में है
परिवार और दोस्ती की नाराज़गी मौल लेने में है
Sunday और Monday का फ़रक भूलने में है
दिवाली होली ईद जैसे त्योहार को नज़रअंदाज कर
तूफ़ान लक्ष्य प्राप्ति करने के सुकून में है
ये तूफ़ान ऐसे ही नहीं दिखता
ये महसूस किया जा सकता है
एक दृढ़ निश्चय के जुनून में
ये वो भभकती हुई ज्वाला है
जो किसी भी अग्नि शमन से बुझाई नहीं जा सकती
ये एक आम से दिखने वाले इंसान की चुप्पी में है
ये ख्वाबों को हकीकत में बदलने के पागलपन में है
तूफान वायु के वेग में ही नहीं…
ये होता है लक्ष्य ताकती आँखो में है…