
दोस्ती सी हो गई थी रेल से
हर हफ़्ते घर जाना होता था
सीट , ट्रेन , टिकट सब तय था
बस अनुभव नये थे
जनरल डिब्बा अपने आप में
एक कस्बे का नुक्कड़ है
जहाँ हर इंसान के पास एक मशविरा है
और एक शेखी बघारता क़िस्सा
एक बार एक इंसान को घिसड़ लग गई
तो हर आदमी ने इलाज बताया
इतना ज्ञान तो शायद medical science में भी नहीं होगा
की इलाज के सामने चोट छोटी पड़ गई
एक दफ़ा सुबह की ट्रेन ले ली
पौ भी नहीं फटी थी
सोचा रात की अधूरी नींद पूरी कर लू
नहीं तो रात तक उधर रहेगी
तो पूरा दिन उबासी लेकर सूद चुकाना होगा
जैसे ही एक झौका नींद का आया
तो लगा की सपने में मैं झरने में नहा रहा हूँ
पानी का बहाव इतना तेज हो गया की
मेरी आँख खुल गई
तब ज्ञात हुआ की ये झरना का स्रोत
एक शिशु था
वो भी सोते हुए ना जाने सपने में क्या देख कर
मूत्र विसर्जन कर रहा था
की ऊपर की बर्थ के लकड़ी के फट्टो के बीच से
मुझे सपने से उठा रहा था
हल्ला मचाया तो माँ भी नींद से जागी
फिर चारो तरफ़ से सलाह बरसने लगी
एक काम के इंसान ने paper soap दिया
तो मैंने मुंह धोया
पर उस भीड़ मैं इतना ही कर पाया
और सोचा शायद बाल condition हो जाए
इस सकारात्मक सोच के साथ
मैंने बाक़ी का सफ़र पूरा किया
कभी कभी सफ़र में हमसफ़र भी मिल जाता है
पर मुझे एक पुराना दोस्त मिला
दीवाली का मौसम था तो
एक पुरानी सहपाठी भी मिली
हमने सोचा चलो सफ़र अच्छा कट जाएगा
क्या पता होली तक जीवन में रंग भर आयेगा
पर भगवान फूल के साथ कांटे भी देता है
जैसा मेरा दोस्त
और वो कांटा नहीं दीवाली का पटाखा निकला
उसने बिना जाने मेरी सहपाठी को
न जाने cool college life का क्या पाठ पढ़ाया
की मैं तो बस आते जाते बेचने वालो की
canvassing करता नज़र आया
मैंने उन दोनों को coffee पिलाई
जैसे मैं था लड़की का भाई
That day I realised lot can happen over coffee
चाहे वो CCD की भी न हो
वो ट्रेन यात्रा यादगार बन गई
उनके लिए
जब उनकी फ़ोटो मैंने
कुछ सालों बाद instagram पर देखी
एक दूसरे को रिंग पहनाते हुए
और मुझे tag करते हुए
saying thank you Prateek
For matching us
You are Cupid !
एक बार को ऐसा लगा की
Anupam Mittal बन जाऊ
दूसरो की शादी करा कुछ पैसे कमाऊ
ख़ैर उस ट्रेन से मैंने घर जाना छोड़ दिया
जिसे उस couple ने love express नाम दे दिया
भला हो मोदी का उसने वंदे भारत चलायी
क्यूंकि मुझे love express सुन कर ही उल्टी आती
अब कोई लड़की बैठ भी जाए बराबर में
मैं focus करता हूँ बस खेत देखने में
वो भी टोपी पहन कर
की कहीं ट्रेन के अंदर
फिर बरसात न आ जाए कहीं से
