ये दिल है की मानता नहीं !

जवाब मालूम था मुझे
पर ये दिल कहाँ माने
उसे है अभी भी उम्मीदे
की शायद उसकी ज़ुबान
उसकी आँखों और तल्खी का साथ न दे

अपने दिल के सामने मजबूर होकर
आत्मसम्मान को तिजोरी में बंद कर
मैंने उसको पूछा –
“क्या मेरी जीवनसाथी बनोगी”
वो थोड़ी घबरा गई
की कैसे मुझे मुंह पर मना करे
कैसे इसे मेरी बेरुखी न समझे
मैंने फिर पूछा –
“क्या मेरी हमसफ़र बनोगी”
उसे बड़ा ज़ोर लगा कर बोला – “sorry”

जाने कहा हिंदी के बीच अंग्रेज़ी आन पड़ी
शायद ज़्यादा चोट न पहुँचाती हो अंग्रेज़ी
आख़िर वो भी नाज़ुक स्थिति में थी
की मैं भावुक न हों जाऊ
वरना ज़िन्दगी भर मलाल में रहती

जवाब मूझे ज़रूर था पता
फिर भी बुरा लगा
सच्चाई कड़वी तो होती है
आज महसूस भी हुआ

अब दिल शायद समझे
उम्मीदों का दामन छोड़े
मायूस तो हो गया था
एक बार तो धड़कना भी भूल गया
फिर मैंने उसको समझाया
कुछ नहीं हुआ
किसी कोने में छुपा लो उसको
उसकी याद आए तो
ठहर कर ढूंढ लेना
उस कोने में ही मिलेगी हमेशा

फिर ले लेना छुट्टी ‘आज’ से
और जी लेना कुछ पल अतीत में

जहाँ है उसकी खट्टी-मीठी बाते
कुछ पुराने किस्से और अधूरी वादें
झूम लेना खुमारी में साक़ी
अब यही रह गया है बाक़ी

इश्क़ है या dinosaur

क्या भाई
कौन हो तुम
कैसे दिखते हो
कहाँ मिलते हो
कहाँ पाए जाते हो
सुना बहुत है तुम्हारे बारे में
पर कभी देखा नहीं

न जाने कितने लोग ने अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर दी
और न जाने कितनों ने आबाद (अपनी जेब भरकर)
पर कोई बता नहीं पाया की तुम मिलोगे कहाँ

लोग भागते चले जा रहे है तुम्हें ढूँढते हुए
कभी फूलो की दुकान पर
तरह तरह के कैफ़े – restaurant पर
मंगलवार को मंदिरों में
आज कल bumble-tinder पर

सड़को पर बाइक घुमा घूमा कर
petrol ख़त्म कर दिया Dubai का
उसे अब tourist spot बनना पड़ा

इतने मे तो सरकारी नौकरी मिल जाती
पर तु न मिल रहा

मैंने भी ढूंढा, कहनी, किस्सो में
गानो में, फ़िल्मों में
कॉलेज की कैंटीन में
लाल क़िले की दीवारों पर
व्हिस्की की बॉटल में
और सुसाइड पॉइंट पर
पर कही भी इसके अवशेष न मिले
थोड़ी अश्लीलता ज़रूर नज़र आई

इतिहास की किताबो में भी इसका उल्लेख है
कुछ लड़ाइयाँ भी हुई
पर दिखता कैसा है इसका कोई विवरण नहीं
आज कल भी सुना murder , honour killings हो जाती है

पर ये नामाकूल मिलेगा कहाँ
कोई तो बताए
किसी से पूछो तो कहता है
इश्क़ मुकम्मल नहीं होता
ये अधूरा ही रहता है
ख्वाबो, खयालों और यादों में
कहता है इंसान मर जाता है
पर इश्क़ ज़िंदा रहता हूँ
बताओ ये भी कोई बात हुई

मैंने कहा किसी ने कोई फोटो तो बनाई होगी
जैसे राजा रवि वर्मा ने भगवान राम की कल्पना की थी
बोला पागल है क्या

अरे फोटो तो लुप्त हुए है dinosaur की भी बन जाते है
Spielberg ने तो उस पर 3-4 फ़िल्में बना डाली
ये इश्क़ पता नहीं कौन सा अफ़लातून है

Newton को gravity मिल गई
पर किसी को यहाँ इश्क़ न मिला
शायद वो dinosaur इश्क़ करते थे
इसलिए लुप्त हो गए !

क्या करूँ…

किसी में सही कहा था
जुदाई में मोहब्बत लावारिस हो जाती है
वो बिना साहिल के भटकती हुई
कहीं पनाह ढूँढती है
उसे नहीं पता कहा जाना है

ये मोबाइल बेजान हो जाता है
इसी के बहाने वो मेरे करीब थी
कभी Snapchat की streak
तो कही insta reel
या रात भर चलने वाली video call

अब ये cafe-clubs बंद भी हो जाए तो हमे क्या
और बंद ही हो जाए तो अच्छा है
नहीं तो ख्याल आता है की उसको यहाँ ले जाते
ये coffee पिलाते
उसे avocado toast बहुत पसंद थे

खाने में भी कोई स्वाद नहीं आता
क्यूंकि स्वाद तो उसके साथ का था
मीठा हो या नमकीन
सब खट्टा और कड़वा ही लगता है

अब रात में सोने के अलावा कोई चारा नहीं
पर कुछ ख़ास अंतर नहीं
जागो तो उसकी याद आती है
और आँखे बंद करो तो उसके ही सपने

उसकी गली के सामने से गुज़रता हूँ
तो रोंगटों में सिहरन होती है
जैसे उसकी ख़ुशबू मेरे रोम को छूकर निकली हो
रोकता हूँ ख़ुद को बस कैसे ही
उस की गली में जाने से

कैसे मिलू उन दोस्तों से
जो उसके साथ रहने लिए
दूर हों गए थे
कैसे बनाऊ अब नए रिश्ते
क्यूंकि पुराने तो उसके लिए छोड़ दिए थे

ये तोहफ़े जो उसने दिए थे
अब एक अधूरी मोहब्बत की स्मारक भर है
उसका समान कुछ पड़ा है
सहेज लू या जला दु, अजीब कश्मकश है
पर अपने अंदर उसकी यादों का क्या करु
जो दिन के हर पहर
साल के हर मौसम से जुड़ी है

क्या करूँ मैं अब ख़ाली समय का
क्यूँकि हर पल उसका था
इस ख़ाली दिमाग़ का
जो सिर्फ़ उसने बारे में सोचता था
और इस दिल का
जो सिर्फ़ उसके लिए धड़कता है

ये मोहब्बत की कविताएँ
सरासर झूठी लगती है
कहा होती है इतनी मोहब्बत
मैंने तो की थी पर
मुझे तो मायूसी ही हाथ लगी

Mea culpa

I regret that moment,

The moment you
were disappointed,
got angry,
became despair,
gave up,
moved on,

You may have
grumbled curses under your breath,
hit me an invisible bludgeon,
kicked in the shin,
punched in the stomach,
thrown water on my face,

I wish you to have done it all,
shouted in place of deafening silence,
reprimanded rather than ignoring,
broke bones instead of hopes,
slapped as opposed to staring,
unleashed your wrath,

Atleast you would have spat,
the venom of bitternes,
latched the broken chains,
dumped the past,
moved to sort differences,
ironed out the wrinkles,

And healed our relation
the Japanese way,
mending cracks with gold,
ornated with fine shining lines,
the pot of relationship,
brandishing unbreakable bond,

Neither one of us is perfect,
but imperfection binds us,
the acceptance of errors,
differentiates us,
each anomaly is a stepping stone ,
to reach acme of Xanadu.