जवाब मालूम था मुझे पर ये दिल कहाँ माने उसे है अभी भी उम्मीदे की शायद उसकी ज़ुबान उसकी आँखों और तल्खी का साथ न दे
अपने दिल के सामने मजबूर होकर आत्मसम्मान को तिजोरी में बंद कर मैंने उसको पूछा – “क्या मेरी जीवनसाथी बनोगी” वो थोड़ी घबरा गई की कैसे मुझे मुंह पर मना करे कैसे इसे मेरी बेरुखी न समझे मैंने फिर पूछा – “क्या मेरी हमसफ़र बनोगी” उसे बड़ा ज़ोर लगा कर बोला – “sorry”
जाने कहा हिंदी के बीच अंग्रेज़ी आन पड़ी शायद ज़्यादा चोट न पहुँचाती हो अंग्रेज़ी आख़िर वो भी नाज़ुक स्थिति में थी की मैं भावुक न हों जाऊ वरना ज़िन्दगी भर मलाल में रहती
जवाब मूझे ज़रूर था पता फिर भी बुरा लगा सच्चाई कड़वी तो होती है आज महसूस भी हुआ
अब दिल शायद समझे उम्मीदों का दामन छोड़े मायूस तो हो गया था एक बार तो धड़कना भी भूल गया फिर मैंने उसको समझाया कुछ नहीं हुआ किसी कोने में छुपा लो उसको उसकी याद आए तो ठहर कर ढूंढ लेना उस कोने में ही मिलेगी हमेशा
फिर ले लेना छुट्टी ‘आज’ से और जी लेना कुछ पल अतीत में
जहाँ है उसकी खट्टी-मीठी बाते कुछ पुराने किस्से और अधूरी वादें झूम लेना खुमारी में साक़ी अब यही रह गया है बाक़ी
किया उसको आधा , मन में था की मिले उसको ज़्यादा वो कुछ आड़ा-टेढ़ा हुआ टूटा हुआ एक हिस्सा मैंने offer किया
ठुकरा दिया उसे बड़ी बेरहमी से बिना देखे , बिना जाने भला क्या गुस्ताखी की थी उसने
नाराज़गी जो थी मुझसे गाज़ गिरी chocolate के उस टुकड़े पे
तरस आया उस silky-smooth chocolate पर की काश ये मैंने न दी होती तो ये अपने अंजाम तक पहुँच गई होती मुंह में लार की उफनी हुई लहरो में समा कर ज़ुबान को अपनी मादकता में मदहोश कर भेजती तार दिमाग़ की उन नसों को रोज़मर्रा की कश्मकश में मशगूल थे जो की जरा ठहरो दो पल के लिए ये अनमोल स्वाद सहेज लो अनंत तक के लिए
पर ऐसा कुछ होने से पहले ही वो wrapper फटा रह गया वो chocolate का टुकड़ा धरा का धरा रह गया
तरस आता है उस chocolate पर की किसी और के हाथ में होती तो इतनी बेइज़्जत न सहती
दिल का क्या है उसे तो ठोकरों की आदत है पर चॉकलेट के साथ ये नहीं होना चाहिए था
वो टूटे हुए हिस्से पड़े रहें उस फटे हुए wrapper में रखा रह है गया जो किसी bag में वो दोनों हिस्से अपनी अपनी जगह पिघल गए wrapper से बाहर भी निकले पर न कभी जुड़ पाए न जुदा हो पाये
शायद रही होगी उसकी भी कोई मज़बूरी वरना कौन बनाता है chocolate से दुरी पर एक बार दिल की बात तो साझा करती मुझे लायकी साबित करने का मौका तो देती बिना चखे तो chocolate का स्वाद भी नहीं समझाता ये तो इश्क है जनाब खाली लिफाफा देख, दिल थोड़े है धड़कता
अगर वो wrapper कभी फटता ही नहीं ये दिल कभी ऐसे किसी के लिए धड़कता ही नहीं पड़ी रहती वो chocolate उस wrapper में ही इसके टुकड़े भी न होते कभी अब टूटे हिस्सो को कैसे जोड़े अब chocolate दोबारा कैसे खाये दिख भी जाती है इश्तेहार में कहीं उभर आती है तस्वीर उस wrapper की फटी हुई
काश वो chocolate कभीं ख़रीदी न होती काश वो ज़िन्दगी में आई भी न होती ख़ुश था मै बिना जाने की chocolate है ख़ुश था मैं बिना जाने की इश्क़ जैसा कोई एहसास भी है
वो chocolate का wrapper आख़िर क्यों फाड़ा था मैंने
दोस्ती सी हो गई थी रेल से हर हफ़्ते घर जाना होता था सीट , ट्रेन , टिकट सब तय था बस अनुभव नये थे
जनरल डिब्बा अपने आप में एक कस्बे का नुक्कड़ है जहाँ हर इंसान के पास एक मशविरा है और एक शेखी बघारता क़िस्सा
एक बार एक इंसान को घिसड़ लग गई तो हर आदमी ने इलाज बताया इतना ज्ञान तो शायद medical science में भी नहीं होगा की इलाज के सामने चोट छोटी पड़ गई
एक दफ़ा सुबह की ट्रेन ले ली पौ भी नहीं फटी थी सोचा रात की अधूरी नींद पूरी कर लू नहीं तो रात तक उधर रहेगी तो पूरा दिन उबासी लेकर सूद चुकाना होगा
जैसे ही एक झौका नींद का आया तो लगा की सपने में मैं झरने में नहा रहा हूँ पानी का बहाव इतना तेज हो गया की मेरी आँख खुल गई तब ज्ञात हुआ की ये झरना का स्रोत एक शिशु था वो भी सोते हुए ना जाने सपने में क्या देख कर मूत्र विसर्जन कर रहा था की ऊपर की बर्थ के लकड़ी के फट्टो के बीच से मुझे सपने से उठा रहा था
हल्ला मचाया तो माँ भी नींद से जागी फिर चारो तरफ़ से सलाह बरसने लगी एक काम के इंसान ने paper soap दिया तो मैंने मुंह धोया पर उस भीड़ मैं इतना ही कर पाया और सोचा शायद बाल condition हो जाए इस सकारात्मक सोच के साथ मैंने बाक़ी का सफ़र पूरा किया
कभी कभी सफ़र में हमसफ़र भी मिल जाता है पर मुझे एक पुराना दोस्त मिला दीवाली का मौसम था तो एक पुरानी सहपाठी भी मिली
हमने सोचा चलो सफ़र अच्छा कट जाएगा क्या पता होली तक जीवन में रंग भर आयेगा पर भगवान फूल के साथ कांटे भी देता है जैसा मेरा दोस्त और वो कांटा नहीं दीवाली का पटाखा निकला उसने बिना जाने मेरी सहपाठी को न जाने cool college life का क्या पाठ पढ़ाया की मैं तो बस आते जाते बेचने वालो की canvassing करता नज़र आया
मैंने उन दोनों को coffee पिलाई जैसे मैं था लड़की का भाई That day I realised lot can happen over coffee चाहे वो CCD की भी न हो
वो ट्रेन यात्रा यादगार बन गई उनके लिए जब उनकी फ़ोटो मैंने कुछ सालों बाद instagram पर देखी एक दूसरे को रिंग पहनाते हुए और मुझे tag करते हुए saying thank you Prateek For matching us You are Cupid !
एक बार को ऐसा लगा की Anupam Mittal बन जाऊ दूसरो की शादी करा कुछ पैसे कमाऊ
ख़ैर उस ट्रेन से मैंने घर जाना छोड़ दिया जिसे उस couple ने love express नाम दे दिया भला हो मोदी का उसने वंदे भारत चलायी क्यूंकि मुझे love express सुन कर ही उल्टी आती
अब कोई लड़की बैठ भी जाए बराबर में मैं focus करता हूँ बस खेत देखने में वो भी टोपी पहन कर की कहीं ट्रेन के अंदर फिर बरसात न आ जाए कहीं से
ये पर्दों से झाँकती हुई रोशनी से नफ़रत है मुझे ये मेरे सुबह के मीठे नींद में खलल डालती है
जहाँ एक तरह कूकर की सिटी और दूसरी तरफ दूध वाले की घंटी मेरे सपने में विघ्न पैदा करते है
तो मेरा पति भी अखबार के पन्नो की सरसराहट से मेरे सपनों की विद्या बालन को मंजुलिका बना देता है फिर कहते है की तुम पुरे दिन चिडचिडी क्यों रहती
न जाने सुबह सुबह देश और दुनिया का हाल जानकर ही मोदी बनेंगे क्या पजामा तो मिलता नहीं खुद से
बाहर जाने को बोलो तो इतनी हवा करते है की ट्रक के टायर भर जाये
उठ कर भी शांति कहाँ जोर जोर से ब्रश करते है कुल्ला तो ऐसे करेंगे की सुनामी आ गयी हो
फिर बहार जाकर अपने ही जैसे किसी फालतू इंसान को फोन करेंगे बत्तें सुन कर लगता है की RBI Governor अब foreign policy भी बना सकते है पर इनसे राय ले लेते तो शायद वो और अच्छा कर पाते
cook aunty भी इतनी aunty नहीं जितना ये उनसे बातें करते है पूरी सोसाइटी की खबर तो ऐसे रखेंगे जैसे यहाँ की CBI हो और इनके agent है guard, electrician, plumber, रिक्शावाला, presswala इतनी घनिष्ठता तो ख़ुद के भाई से नहीं है इनकी
ये सब के बाद ऐसे फालतू reel देखते है की समझ आता है कितनी पढाई कर लो, अकल नहीं आती मतलब ट्रक वाला की life में तुम्हे इतना interest क्यों इस से तो किसी actress को follow कर लेते कम से कम कुछ fashion sense तो आती
कभी कभी इनका आलसी शरीर हिल भी जाता है exercise तो करते है पर loud music में ही जाने lean on सुने बिना workout नहीं हो सकता क्या
इतना शोर होने के बाद मुझे उठाना ही पड़ता है फिर मैं परदे हटाती हूँ ये सोचते हुए की काश कोई पर्दे होते जो रौशनी के साथ शोर भी रोक सकते
फिर कहते है अरे, तुम क्यों उठ गयी शांति से सो जाओ Sunday है मैं तुम्हारे लिए special breakfast बना रहा हूँ
ये सुन कर तो मेरे होश फ़ाख्ता हो गए ख़ुद को “रणवीर बरार” समझ कर एक तो पता नहीं कौनसे देश की dish को देसी तड़का मार देते है फिर ज़बरदस्ती तारीफ़ करो क्यूँकि फोटो खिचने के चक्कर में एक तो ठंडी हो जाती है एक बात बताऊ – वो इतनी अच्छी होती नहीं, जितनी फोटो में दिखती है बाद में , चुपके से , ब्रेड मलाई ही खानी पड़ती है,
फिर किचन तो पूछो मत सारे बर्तन में कुछ न कुछ बना होता है maid aunty भी कहती है की sunday को extra payment किया करो भैया बहुत बर्तन गंदा करते है
फिर लगता है की monday ही अच्छा है सुबह office चले जाते है शांति से बिना पर्दे हटाए
इठलाता हुआ एक तरफ़ हरी तो दूजी और लाल चटनी लिए चलता है समोसा
उसे गुरूर है की मुझे कौन हटा सकता है सरकारी दफ़्तरो को मीटिंग Evening snacks बच्चों की birthday party या सुबह के नाश्ते से चाहे रिश्ता पक्का करना हो या cocktail party मैं तो हर तरफ़ हूँ मेरे नाम पर तो kitty party भी चलती है – समोसा किटी
तभी तो नौक निकल कर अपने किनारे पैने करके रहता है मौके के हिसाब से छोटा बड़ा हो जाता है जगह और season के हिसाब से ख़ुद को एडजस्ट भी कर लेता है आलू तो है ही सर्दियो में गोभी या मटर Lavish करना हो तो काजू किशमिश या पनीर या south में जाओ तो राइ करिपटा और तो और non-veg में कीमा का भी बन जाता है health conscious लोगो के लिए Baked समोसा भी आने लगा है इस versatility को कौन टक्कर दे पाएगा
हुए थे कुछ खड़े जैसे की ढोकला – खाते हुए तो पानी गिरने लगता है Patties – आधी पापड़ी बिखरी पड़ी रहती है, जैसे किसी छोटे बच्चे ने खाया हो, शोभा देता इस तरह खाना
कचौड़ी थोड़ी टिक पायी पर बिना आलू की सब्ज़ी के वो जल बिन मछली लगती है पकौड़ी ने भी काफ़ी मशक्कत करी पर वो अपनी variety में ही उलझ कर रह गए की आलू का मंगाये या गोभी का या प्याज का या ब्रेड का अब वड़ा पाव भी आ रहा है टक्कर में पर जितने में उसका वड़ा बनेगा उतने में मैं पूरा बन जाऊँगा और पाव में fit हो जाऊ
विदेश से भी कुछ लोग आए थे competition देने Burger, sandwich जैसे तो उनका बन-समोसा और समोसा-सैंडविच बना दिया 😈
इंसान कुछ भी experiment कर ले घूम फिर के समोसे में पास ही आ जाता है इतनी सहूलियत कोई भी नहीं दे पाता न और इसके साथ अदरक वाली चाय हो जाए तो स्वाद में चार चाँद लग जाए
पर क्या अजूबा बनाया है ये तिकोना सा पूर्वोत्तर में जिसे सिंघाड़ा भी बोलते है जैसे कोई लाला मुंह फुलाये बैठा हो
पहला दिन था कॉलेज का बस रैगिंग से बचना था पर एक लड़की ने पकड़ लिया बोली – fresher I said – yes बोली- ओह फ़च्चे , चल मेरा बैग उठा कर हॉस्टल रख पेट में हुई गुड गुड पर चुपचाप मैंने बैग दिया पटक
अगले दिन वो लड़की मेरे सेक्शन में yes mam बोली तो मैंने उससे निगाहे मिलायी उसने एक guilty स्माइल दे कर नज़रे हटायी मैं भी चुप रहा batchmate से ragging, ये अपमान मन में दबा लिया
फिर एक दिन उसके बराबर में सीट मिली तो अपनी curiosity को हवा दी तुमने मुझसे बैग क्यों उठवाया बोली तुम सीधे लगे तो बस फ़ायदा उठाया I said – u need to pay for it She said – will you have Maggi फिर कैंटीन गए और मैगी खायी तो थोड़ा कुली की फीलिंग आई पर पेट मे थोड़ी butterfly भी उड़ी
फिर ये पहचान दोस्ती में बदली क्यूंकि हमारे हॉस्टल भी थे पड़ोसी In today’s term Our nanoship became friendship
बाबा मोहनीश बहल के अनुसार लड़का लड़की न रह पाए दोस्त फिर एक बार पहले situationship हुई यानी awkwardness की बोले की नहीं
एक दोस्त ने मुझे चढ़ा दिया तो मैंने propose करने का ठान लिया लगाया perfume उधार का बनवाया एक गुलदस्ता प्यार का गये फिर एक सुंदर सा cafe पेट में butterfly लगी उड़ने फिर वो आई सामने गुलदस्ता पेश किया हमने जैसे ही लगा कुछ बोलने निकली बस कुछ हवा ही मुंह से जैसे सारी butterfly पेट से निकल कर बाहर आ गई
वो मेरे माथे पर पसीना और हाथ का कपकपना देख कर समझ गई मुस्कुराई और बोली – you are too cute मुझे समझ नहीं आया (मुझे लगा हँसी और पटी) पर फिर भी मैंने फिर ज़ोर लगाया I like you , will you be my girlfriend? वो फिर मुस्कुराई और बोली – finally you asked और हंस पड़ी हमने officially hug किया रिश्ते को अब relationship पर promote किया (भले ही Benching, breadcrumbing साथ में चलता रहा) पर अब भी वो जब साथ होती है पेट में butterfly थोड़ी गुदगुदी तो करती है…
क्या भाई कौन हो तुम कैसे दिखते हो कहाँ मिलते हो कहाँ पाए जाते हो सुना बहुत है तुम्हारे बारे में पर कभी देखा नहीं
न जाने कितने लोग ने अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर दी और न जाने कितनों ने आबाद (अपनी जेब भरकर) पर कोई बता नहीं पाया की तुम मिलोगे कहाँ
लोग भागते चले जा रहे है तुम्हें ढूँढते हुए कभी फूलो की दुकान पर तरह तरह के कैफ़े – restaurant पर मंगलवार को मंदिरों में आज कल bumble-tinder पर
सड़को पर बाइक घुमा घूमा कर petrol ख़त्म कर दिया Dubai का उसे अब tourist spot बनना पड़ा
इतने मे तो सरकारी नौकरी मिल जाती पर तु न मिल रहा
मैंने भी ढूंढा, कहनी, किस्सो में गानो में, फ़िल्मों में कॉलेज की कैंटीन में लाल क़िले की दीवारों पर व्हिस्की की बॉटल में और सुसाइड पॉइंट पर पर कही भी इसके अवशेष न मिले थोड़ी अश्लीलता ज़रूर नज़र आई
इतिहास की किताबो में भी इसका उल्लेख है कुछ लड़ाइयाँ भी हुई पर दिखता कैसा है इसका कोई विवरण नहीं आज कल भी सुना murder , honour killings हो जाती है
पर ये नामाकूल मिलेगा कहाँ कोई तो बताए किसी से पूछो तो कहता है इश्क़ मुकम्मल नहीं होता ये अधूरा ही रहता है ख्वाबो, खयालों और यादों में कहता है इंसान मर जाता है पर इश्क़ ज़िंदा रहता हूँ बताओ ये भी कोई बात हुई
मैंने कहा किसी ने कोई फोटो तो बनाई होगी जैसे राजा रवि वर्मा ने भगवान राम की कल्पना की थी बोला पागल है क्या
अरे फोटो तो लुप्त हुए है dinosaur की भी बन जाते है Spielberg ने तो उस पर 3-4 फ़िल्में बना डाली ये इश्क़ पता नहीं कौन सा अफ़लातून है
Newton को gravity मिल गई पर किसी को यहाँ इश्क़ न मिला शायद वो dinosaur इश्क़ करते थे इसलिए लुप्त हो गए !
क्या दिन थे वो जब छोटे थे मोहब्बत क्या होती है क्या पता था पर हो जाती है ये भी नहीं पता था
कोई क्यूँ अचानक से अच्छा लगने लगता था उसकी एक झलक के लिए घंटे भी पलों में गुजरते थे कभी खिड़की से झांकते कभी नुक्कड़ पर खड़े रहते छत के चक्कर काटते पड़ोस में जो रहने आयी थी वो
फिर उसने मेरे स्कूल में ही दाखिला लिया सेक्शन अलग था इसलिए उस क्लासरूम के भी चक्कर लगने लगे उसकी क्लास के लड़के दोस्त बन गए उसकी नज़र में आने की कोशिश में टिफिन वहीं खुलता था इंटरवल में उसकी डेस्क के आसपास यूँ ही चक्कर कटता था पानी की टंकी पर उसके इंतज़ार में न जाने कितनी बोतले भरवा दीं पर दिल नहीं भरता था
कोशिश यही रहती थी कि उसकी साथ निकलूँ और उसके साथ ही साइकिल चला कर वापस आऊँ यूँ मन करता था कि उसकी नज़र में अच्छा हो जाऊँ अब पढ़ने का भी मन करने लगा था क्योंकि वो पढ़ाई में अच्छी थी क्रिकेट में भी कम और बैडमिंटन में ज्यादा मन लगता था
उसकी मुस्कुराहट से बनता था दिन और आंसुओ से दिल दहल जाता था ऐसे ही स्कूल निकल गया उसके आसपास मंडराते हुए
कॉलेज की छुट्टियों में वो आती थी तो मन फिर से हिलोरे मारने लगता था ऐसा अटक गया था कि कोई अप्सरा भी ये तपस्या न भंग कर पाती
बातचीत होती रही पर भावनाओं को अभिव्यक्ति और प्रेम को प्रत्यक्ष रूप न दे पाया
उससे प्रेरित होकर काबिल हो गया हूं सोचा मैं कुछ तो बन गया तो मोहब्बत को आगे बढ़ाऊं
पर वो आगे बढ़ चुकी थी उसे उसकी मोहब्बत मिल चुकी थी झटका तो लगा पर मन मसोसने वाली क्या बात थी उसने जिसे चुना होगा वो भी लाखों में कोई नगीना होगा
उसकी पसंद है इसलिए ज़िद नहीं नहीं तो हिटलर, मुसोलिनी, स्टालिन मिला कर विश्वयुद्ध की झड़ियां लगा देता
और मोहब्बत है न तो ज़िद कैसी हासिल करना ही मकसद थोड़े है, मोहब्बत तो ज़िंदाबाद थी, ज़िंदाबाद है और, ज़िंदाबाद रहेगी
उसकी यादों का झुरमुट मेरी हर सांस में है मेरी सफलता ही मोहब्बत है मैं खुशनसीब हूं की मोहब्बत के लायक बन पाया
किसी में सही कहा था जुदाई में मोहब्बत लावारिस हो जाती है वो बिना साहिल के भटकती हुई कहीं पनाह ढूँढती है उसे नहीं पता कहा जाना है
ये मोबाइल बेजान हो जाता है इसी के बहाने वो मेरे करीब थी कभी Snapchat की streak तो कही insta reel या रात भर चलने वाली video call
अब ये cafe-clubs बंद भी हो जाए तो हमे क्या और बंद ही हो जाए तो अच्छा है नहीं तो ख्याल आता है की उसको यहाँ ले जाते ये coffee पिलाते उसे avocado toast बहुत पसंद थे
खाने में भी कोई स्वाद नहीं आता क्यूंकि स्वाद तो उसके साथ का था मीठा हो या नमकीन सब खट्टा और कड़वा ही लगता है
अब रात में सोने के अलावा कोई चारा नहीं पर कुछ ख़ास अंतर नहीं जागो तो उसकी याद आती है और आँखे बंद करो तो उसके ही सपने
उसकी गली के सामने से गुज़रता हूँ तो रोंगटों में सिहरन होती है जैसे उसकी ख़ुशबू मेरे रोम को छूकर निकली हो रोकता हूँ ख़ुद को बस कैसे ही उस की गली में जाने से
कैसे मिलू उन दोस्तों से जो उसके साथ रहने लिए दूर हों गए थे कैसे बनाऊ अब नए रिश्ते क्यूंकि पुराने तो उसके लिए छोड़ दिए थे
ये तोहफ़े जो उसने दिए थे अब एक अधूरी मोहब्बत की स्मारक भर है उसका समान कुछ पड़ा है सहेज लू या जला दु, अजीब कश्मकश है पर अपने अंदर उसकी यादों का क्या करु जो दिन के हर पहर साल के हर मौसम से जुड़ी है
क्या करूँ मैं अब ख़ाली समय का क्यूँकि हर पल उसका था इस ख़ाली दिमाग़ का जो सिर्फ़ उसने बारे में सोचता था और इस दिल का जो सिर्फ़ उसके लिए धड़कता है
ये मोहब्बत की कविताएँ सरासर झूठी लगती है कहा होती है इतनी मोहब्बत मैंने तो की थी पर मुझे तो मायूसी ही हाथ लगी