मर्दानगी से metrosexuality तक…

“क्या लड़कियों की तरह रो रहा है?”
“मर्द को दर्द नहीं होता!”
“रो क्यों रहे हो… लड़की है क्या?”

ऐसी बातें सुन कर,
बड़े हुए हैं हम लड़के।

हमें सिखाया गया—
मर्द बनो।
मजबूत बनो।
आँसू?
वो तो कमज़ोरों के लिए होते हैं।

समाज हमें
लोहा बनाना चाहता था।
पर सच बताऊँ?
हम coconut बन गए

बाहर से सख़्त।
अंदर से नरम
जैसे आँसू अंदर रोक लिए हो

दिल में सहानुभूति तो बहुत उमड़ती है,
पर उसे व्यक्त करने से डर लगता है—
कहीं इस फोफली मर्दानगी की दरारों से
मेरी संवेदनशीलता न झलक जाए।

फिर समय बदला।

लड़कियाँ पढ़ने लगीं,
अपनी आवाज़ बनाने लगीं।

वो माँ बनीं,
बहन बनीं,
पत्नी बनीं,
सजनी बनी

और कहीं-कहीं
बस एक अच्छी दोस्त भी बनीं।

और उन्होंने
लड़कों के दिल को
हल्के से छूकर कहा—

कि भाई…
खाली दिमाग से ही नहीं,
दिल से सोचना भी ठीक है।

कि रो लेना बुरा नहीं होता—
आँखें साफ़ हो जाती हैं,
और मन भी हल्का।

कि हर वक़्त गंभीर रहना
कोई महानता नहीं,
कभी-कभी हँसना और हँसाना भी
स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी है।

कि किसी लड़की से बात करने से
वो गर्लफ्रेंड नहीं बन जाती…
वो बस
एक अच्छी दोस्त भी हो सकती है।

और हाँ—
मर्दों का सजना-संवरना भी ठीक है।

facial, manicure, pedicure
तुम भी करा लोगे तो कोई हर्ज नहीं हैं।

गुलाबी रंग
सबका है।

और fashion magazine पढ़ना
कोई सामाजिक अपराध नहीं।

तो जनाब—
ये मर्दानगी से
metrosexuality का सफ़र
इतना मुश्किल भी नहीं है।

असल में…

ये सफ़र
मर्द बनने से
इंसान बनने तक का है।

जहाँ आँसू
मार्मिकता होते हैं।

जहाँ आईने में खुद को सँवारना
खुद से मोहब्बत होती है।

और तब समझ आता है—

कि असली मर्दानगी
दाढ़ी की लंबाई में नहीं,
दिल की गहराई में होती है।

shampoo और conditioner
का फ़र्क जानने में होती है।

साबुन के साथ
facewash, scrub और bodywash
लगाने में होती है।

Boroline के साथ
aloe vera moisturizer
और sunscreen लगाने में होती है।

फिटकारी के साथ
after shave gel लगाने में होती है

matching tie के साथ
colorful socks पहनने में होती है।

action film के साथ
chick flick देखने में होती है।

gym के साथ
कभी zumba करने में होती है।

cricket match के साथ
कभी cooking show देखने में होती है।

रात की पार्टी के बाद
सुबह चाय बनाने में होती है।

और कभी-कभी
खुद के लिए
एक अच्छा perfume चुनने में भी होती है।

असली मर्दानगी
आवाज़ ऊँची करके बात रफ़ा दफ़ा करने में नहीं ,
कंधे पर सर टीकाकर चुपचाप बात सुनने में होती है।

ये कलम

कुछ दिनों से कलम स्याही में भिगोता हूँ
और सोचते सोचते
वो स्याही के धब्बे काग़ज़ पर सूख जाते है
पर कोई ख्याल या शब्द ज़हन में न फूटता
सोचा की इस बार फिर क़ुर्बानी लेगा क्या
ये कलम चलने के लिए

मैंने कुछ समय क़ुदरत के बीच गुज़ारा
कुछ किताबों के सफ़हे पलटते हुए
तो कुछ संगीत और शायरी सुनते हुए

पर मुझे पता था ये कलम ऐसे नहीं मानेगा
इसे कुरबानी मेरे दिल की ही लगेगी
न जाने और कितने टुकड़े करेगा ये कलम इस दिल के
पूछता हूँ तो कहता है –
“बस थोड़ी खरोंच ही सहन करनी पड़ेगी
मेरी स्याही से निकले जज़्बात
तुझ पर मरहम का काम करेंगे”
उसे कौन समझाये की ज़ख़म भले ही भर जाते है
पर एक अमिट निशान छोड़ जाते है

उसकी जिद के आगे हारकर
फिर मैंने अपना दिल तोड़ा
एक पत्थर पर मार कर
दर्द तो बहुत हुआ
पर एक सुकून भी मिला
की ये दर्द कलम से निकल जाएगा…

तबादले की चिट्ठी

भवानी राम की चिट्ठी आ गई थी
उसे मेरठ से आगरा तबादला कर दिया था
रुकवाने की अर्ज़ी डाली
पिताजी ने एक मंत्री से भी बात की
चिट्ठी में चिठ्ठी के मिलने के पंद्रह दिन में आगरा पहुंचना था

भवानी राम इंतज़ार में था की इन पंद्रह दिनों में
उसका तबादला रुक जाए
क्यूँकि उसकी शादी थी एक महीने में
नई बहू के साथ नई जगह गृहस्थी जमाना आसान नहीं होगा
ये उसे मालूम था
इसलिए तबादले के रुकवाने के लिए बेचैन था

पंद्रह दिन गुज़र गए
कोई चिट्ठी नहीं आई
भवानी राम को आगरा जाना पड़ा

उसके जाते ही दो चिट्ठी आई
मेरठ वाले दफ्तर में
तो सहकर्मियों ने उत्सुकता से दोनों खोली
की पता नहीं किसमें तबादला रुक गया हो

पर पहली चिट्टी सोनसी की थी
उसकी होने वाली पत्नी
इत्र की ख़ुशबू भी आ रही थी
इस ख़ुशबू में वो सब तबादला वैगरह भूल गए
और चिट्ठी पढ़ने लगे
उसमे बहुत सारी प्यार भरी बातें लिखी थी
“की आपका पिछली चिठ्ठी मिली
उसे पढ़ कर रोम रोम खिल उठा
आप बहुत नटखट है !

(चिठ्ठी के वही अंश पढ़े जा रहे है
जो पढ़े जा सकते है,
सारी बातें यहाँ पब्लिक में बताना उचित नहीं )

मैं भी आपके लिए बहुत कुछ सीख रही हूँ
ऑफिस से आपके आने इंतज़ार करना भी
शाम को अलग अलग तरह के शरबत बनाना भी सीख रही हूँ

पर अभी तो मुझे बस आपकी बारात का इंतज़ार है
घोड़े पर बैठे आप राजा लगेंगे
और मूछों में रौबदार
बस डर रही हूँ की ये मुछे कितना चुभेगी
कम से कम आप दाढ़ी तो नहीं रखते

आप तबादले की ज़्यादा चिंता न करे
मैं पूरा घर संभाल लुंगी
और हम दोनों ही होंगे
तो गृहस्थी भी सीमित होगी
इतना क्या परेशान होना

हम रोज़ ताज महल देखने जाया करेंगे
उसी खिड़की से ताज महल देखेंगे
जिस से शाहजहां देखता था
आप लाल किले पर रहना
मैं ताज महल में रहूँगी

रात की चाँदनी में ताज देखेंगे
जहाँ एक तरफ़ यमुना में
ताज महल की परछाई होगी
दूसरी तरफ़ हमारी

मैं रोज़ नए नए व्यंजन बना कर आपको खिलाऊँगी
आप बोर ही नहीं हों पाया करोगे
अगली चिठ्ठी में बताना की क्या रहा”

ये पढ़ने में दफ्तर वालो को खूब मज़ा आया
फिर दूसरी चिट्ठी खोली तो पता लगा की तबादला रुक गया है
वो चिट्ठी दस दिन देर से आयी थी
उन्होंने दोनों चिट्ठी आगरा भेज दी

भवानी राम आगरा के दफ़्तर पहुँचे
बेमन से कुर्सी पर बैठे हुए थे
न तबादला हुआ न सोनसी की चिठ्ठी आई
मुंह लटक कर मुमताज़ की कब्र तक पहुँच गया था
और रुके हुए आंसुओं का वेग
भाकरा-नागल डैम के पानी की तरह था

जॉइन किए दस दिन हो गये थे
शादी की छुट्टी के लिए फिर मेरठ जाना का दिन आ गया
इतना लटका हुआ चेहरा देख बाबू ने भी जाने दिया
उसके जाते ही अगले दिन दोनों चिट्ठी आगरा पहुँची
उत्साह में फिर दोनों चिट्ठी खोली गई
की कौनसी तबादले की है
फिर उन्होंने सोनसी की चिठ्ठी पढ़ी
और मज़े लिए

उन्होंने दोनों चिठ्ठी इस बार
भवानी राम के घर भेज दी
शादी पाँच दिन बाद थी
चिट्ठियाँ नहीं पहुँची
पर आगरा और मेरठ के दफ़्तर वाले शादी में पहुँच गए
उन्होंने भवानी राम से कहा
“की भाई दाढ़ी मत रखता
और मुछें रखना पर बहुत पैनी नहीं
चाहो तो तबादला ले ही लो
क्यूंकि भाभीजी को ताज महल घूमना है”

उसे कुछ समझ नहीं आया
शादी हो गई पर तबादले रुकने की चिट्ठी नहीं पहुचीं
न ही सोनसी की, जिसका जवाब देना था

अब चिट्ठियों का तो ऐसा ही है
इतनी देर से आती है
की कभी कभी तो बच्चे हो जाते है
लोग retire हो जाते है
पर चिट्ठियाँ नहीं पहुँचती

किट्टू

ये नाम है मेरे cutie pie का
जब आया था छोटू सा था
सिर एक टहनी और कुछ पत्ते
इत्तू सा गमला

इसको मैंने sunlight दिखायी
पानी पिलाया
और खाना भी दिया
organic खाद !

मैंने घर पर ही बनायी थी
सब्ज़ी के छिलके और used चाय पत्ती से
कूड़े वाले भैया तो बोलने लगे
की तुम तो मेरे लिए कूड़ा ही नहीं छोड़ती हो

धीरे धीरे मेरा kittu बड़ा हुआ
उसके नए टहनी और पत्ते आए
वो इत्ता बड़ा हो गया की
नया planter लाना पड़ा

मैंने ceramic का
hand painted pot लिया
और kittu को नई मिट्टी में shift किया

kittu के नए घर की
housewarming party भी करी
सबने kittu को थोड़ा थोड़ा पानी दिया
फिर उसके साथ picture click करी
नया hashtag भी बनाया #growlikekittu

Snack में सिर्फ़ herbal tea
और fresh fruits थे
उनके remains से मैं
kittu का और खाना बनाऊँगी

अब बस kittu और बड़ा हो जाए
फिर kittu के भाई बहन भी लाएंगे
पूरा family garden बनायेंगे

ये किताबें

ये किताबें इस तरह पीछे पड़ गई है मेरे
जहाँ देखता हो वही दिखती ही
चाहे बिस्तर का सिरहाना हो
या office के मेज़ की दराज़

corner table पर तो सजावटी तौर पर सब रखते है
intellectual दिखने के लिए,
पर मेरे तो सोफे की गद्दी की झिरी से भी झाँक लेती है

सोचा रसोई में जाऊँगा तो नहीं मिलेगी
छौंक के छीटे पड़ने का डर होगा इसको
पर ये ज़ालिम वहाँ भी recipe book बन कर
या एक नज़्म की संकलन बन पड़ी रहती है
की इतने सब्ज़ी सीजने लगे
एक कविता पढ़ीं जा सकती है

बहुत डाँट पड़वाती है मुझको
हर जगह जो बिखरी पड़ी रहती है
संवारने लग जाता हूँ
तो फिर कोई नई सामने आ जाती है
जिसमे bookmark बीच में लगा होता है

फिर ये मेरे बैग में जगह ले लेती है
की चलो पूरा किया जाये
दूसरी ज़रूर नाराज़ हो जाती है
की मुझे क्यों बीच में छोड़ रहे हो

छुपने की भी कोशिश करूँ मैं इनसे
तो उस closet में भी कोई किताब मुझे ढूँढ लेती है

एक बार तो मैंने गुस्से में
अलमारी के ऊपर रख दिया
पड़ने दो धूल
दिखेगी ही नहीं
ख़ुद ही गिर आई मेरे कंधे पर
और ऐसे puppy face बना कर देखा उसने मुझे
मुझे उस पर poly cover चढ़ाना पड़ा

अब मैंने इनसे समझौता कर लिया
और सबको समझा दिया
की ये किताबे तो ऐसे है लुक्का छुपी खेलेगी
बेल की तरह मेज़ की घेर लेंगी
और दूबड़े की तरह उगती ही रहेगी
तुम इनही छुपाओगी
तो ये झाड़ की तरह फ़ैल जाएगी

ननिहाल

रात को नींद ही नही आयी
क्यूंकि आज नानी के घर जाना है
वो भी एक महीने के लिए
मम्मी इतनी सारी books रख ली
मैंने सोचा मम्मी कुछ ज़्यादा ही आशावादी है
की हम वहाँ पढ़ेंगे
मैं तो बस वह जाकर सबके साथ खेलने के लिए बैचैन हूँ

मामा आये है लेने
मैंने साइकिल रखने की ज़िद की
बोले जगह नहीं है
मुझे MRF and के बैट का लालच देकर बैठाया गया

दादा दादी को मिस करूँगा पर
और चाचा को भी
पापा को भी मिस करूँगा
पर वो पता नहीं क्यों
ख़ुश लग रहे थे हमारे जाने से

रास्ते में मम्मी ने चाय पी
इतनी गर्मी में पता नहीं कैसे पीते है
मैंने तो बस चुस्की खायी, ऑरेंज वाली

जैसे ही घर पहुँचे
नानाजी आ गए लेने
उन्होंने उतरते ही हमे चॉकलेट दी
और नानी ने आते ही खिलाना शुरू कर दिया
वो मस्त हलवा बनाती है

फिर मैं अन्नू , पिंकी और चिंटू से मिला
दिन में हम contra-mario खेलतें था
और शाम में क्रिकेट
मुझे हमेशा fielding मिलती थी
जब MRF का बैट आयेगा तो पहली batting करूँगा

मौसी हमे दिन में पढ़ती थी
पूरा holiday homework करा दिया
(क्यूंकि मोबाइल नहीं था, तो फ्री ही रहती थी लड़किया)
उनकी अजीब शर्त थी
की हमारी चोटी बना कर ही पढ़ती थी
हर बार नया style
(अब लगता है हम जाने कौनसा project थे)

एक दिन शाम में हमने pool भरने का plan बनाया
एक जगह से फटा था
हमने उसको टेप से चिपका कर भरा
और उसे भर कर कूदने लगे
चिंटू ने ऐसी jump मारी
की वो फैट गया
और पानी पूरे घर में घुस गया
पानी अंदर और सब लोग घर से बाहर
आजकल तो ऐसे resort में ही होता है
Disaster management जैसी situation हो गई थी
डाँट पड़ती रही पर
हमने तो बस puppy face बनाये रखा

हमे घर में नज़रबंद किया गया
एक दिन मठी के साथ आचार खाने का मन किया
तो बरनी से निकालने लगे
इतना तेल था की बरनी हाथ से फिसल गई
और चकनाचूर ही गई
(जैसे किसी आशिक़ का दिल टूटा हो)
फिर डाँट पड़ी

फिर हमने ludo, carrom के लिए partner मांगे
हमारी energy देखकर
उन्होंने फिर से बाहर भेज दिया

इसी तरह छुट्टियाँ कट गई
आख़िरी में पापा हमे लेने आए
तो काफ़ी अच्छा खाना बनाया नानी ने
मैंने पूछा हमारे लिए क्यों नी बनती ये सब
बोली तेरी शादी होगी तो अपनी ससुराल में बनवाना
फिर मैंने सोच लिया बड़े होते ही शादी करूँगा

मासूम से मोहब्बत

क्या दिन थे वो
जब छोटे थे
मोहब्बत क्या होती है
क्या पता था
पर हो जाती है
ये भी नहीं पता था

कोई क्यूँ अचानक से अच्छा लगने लगता था
उसकी एक झलक के लिए घंटे भी पलों में गुजरते थे
कभी खिड़की से झांकते
कभी नुक्कड़ पर खड़े रहते
छत के चक्कर काटते
पड़ोस में जो रहने आयी थी वो

फिर उसने मेरे स्कूल में ही दाखिला लिया
सेक्शन अलग था
इसलिए उस क्लासरूम के भी चक्कर लगने लगे
उसकी क्लास के लड़के दोस्त बन गए
उसकी नज़र में आने की कोशिश में टिफिन वहीं खुलता था
इंटरवल में
उसकी डेस्क के आसपास
यूँ ही चक्कर कटता था
पानी की टंकी पर उसके इंतज़ार में
न जाने कितनी बोतले भरवा दीं
पर दिल नहीं भरता था

कोशिश यही रहती थी कि उसकी साथ निकलूँ
और उसके साथ ही साइकिल चला कर वापस आऊँ
यूँ मन करता था कि उसकी नज़र में अच्छा हो जाऊँ
अब पढ़ने का भी मन करने लगा था
क्योंकि वो पढ़ाई में अच्छी थी
क्रिकेट में भी कम और
बैडमिंटन में ज्यादा मन लगता था

उसकी मुस्कुराहट से बनता था दिन
और आंसुओ से दिल दहल जाता था
ऐसे ही स्कूल निकल गया
उसके आसपास मंडराते हुए

कॉलेज की छुट्टियों में
वो आती थी
तो मन फिर से हिलोरे मारने लगता था
ऐसा अटक गया था
कि कोई अप्सरा भी ये तपस्या न भंग कर पाती

बातचीत होती रही
पर भावनाओं को अभिव्यक्ति और
प्रेम को प्रत्यक्ष रूप न दे पाया

उससे प्रेरित होकर
काबिल हो गया हूं
सोचा मैं कुछ तो बन गया
तो मोहब्बत को आगे बढ़ाऊं

पर वो आगे बढ़ चुकी थी
उसे उसकी मोहब्बत मिल चुकी थी
झटका तो लगा
पर मन मसोसने वाली क्या बात थी
उसने जिसे चुना होगा
वो भी लाखों में कोई नगीना होगा

उसकी पसंद है
इसलिए ज़िद नहीं
नहीं तो हिटलर, मुसोलिनी, स्टालिन
मिला कर विश्वयुद्ध की झड़ियां लगा देता

और मोहब्बत है न
तो ज़िद कैसी
हासिल करना ही मकसद थोड़े है,
मोहब्बत तो ज़िंदाबाद थी,
ज़िंदाबाद है और,
ज़िंदाबाद रहेगी

उसकी यादों का झुरमुट
मेरी हर सांस में है
मेरी सफलता ही मोहब्बत है
मैं खुशनसीब हूं
की मोहब्बत के लायक बन पाया

कश्मकश

मैंने नहीं मांगा था
उस से दिल
पर वो दे बैठी

रोका ख़ुद को भी मैंने
पर दिल को समझना
मेरे बस की बात नहीं

निकल पड़ा फिर वो
उस के दिल से दिल लगाने

हुआ दिलों का मिलन
पर हुई न किसी को ख़बर
न ही हुआ इल्म दिल देने वालो को

वो तो अपने में मसरूफ़ रहे
और दिल दिल्लगी करते रहे

मोहब्बत का ऐसा भी फ़लसफ़ा है
जो कर रहे है मोहब्बत
उन्ही को न पता है

ये दिल का मामला
इसमें दिमाग़ का क्या काम

अब जब हो गई है मोहब्बत
हो जाए इकरार
क्यों हो
एक दूजे के बिना बेक़रार

चलो, न करो इसे मुकम्मल
किस्सा होगा बेमिसाल

ज़िंदा रहेगी जब मोहब्बत
बिन अपनाये दिलों का हाल

Pressure cooker

When we are young,
Whole world is at arm’s length,
Imitating as Pilot, Doctor,
Astronaut, Scientist,
Artist, Player, Writer,
Are our leisure games,
Because
Everything seems achievable,

As we enter the pressure cooker,
The steam of life,
Start working it’s wonder,
It softens the goal
To a nine to five job

The first whistle is of school,
Homework, toppers, peer pressure,
Suggestions from all directions,
Develops confusion,
With fear of failure,
You loose hope,

The second whistle is of college,
When we have exposure blast,
With no discipline policing,
We indulge in bad habits,
And revolve around,
Banging our head on wall,

The third whistle is of job,
Where you find no link,
Between your past and present,
Education suddenly becomes useless,
Life becomes a timetable,
Chasing after materialistic goals,

The fourth whistle is marriage,
Settling down with wife,
With responsibilities on shoulder,
We put off the gas and let it cook,
With hobbies on back burner,

After the cooling off period,
Suddenly your silver jubilee occurs,
Kids bring back old memories,
And you open a Pandora’s box of aspiration,
And realise that when lid is finally removed
Life has become a potpourri !

Tirade & Triumph

There is no love
There are no feelings
There is lack of emotions,

World is like a machine
Running day and night
On sweat and blood
It gets clogged
With an ounce of tenderness

Keep moving on
With head held high
Heart at right place
But don’t expect
Reciprocity
From anyone
If you give an opening
They will bore a hole

We come alone
And die alone
Alone is our identity
People will come and go
Teach a lesson here and there
You will fall, cry & loose hope
But rebound
That’s the greatest trait
Rebound with bang
Let your enemies hear
Trumpets of success
Read your headlines