घर से दूर,
इस परदेस में,
माँ याद बहुत आती है,
हर पल आती है,
रोज़ के कामो में,
कपडे संवारते हुए,
घरेलु सामग्री खरीदते हुए,
भोजन करते हुए तो कभी-कभी गला रुन्ध्या जाता है,
पर माँ अक्सर बहुत अलग तरीको से भी याद आती है,
जैसे टिफिन के बासी पराठे खाते हुए,
दूध से मलाई उतारते हुए,
सुबह को बादाम भीगे न मिलने पर,
कपडे प्रेस करने पर,
खिड़कियों पर जमी धूल देख कर,
खाने में हरी चटनी की कमी होने पर,
ऑफिस में किसी छोटे बच्चे को देख कर,
साडी दुकान का बोर्ड देख कर,
कही महिला संगीत की बात सुन कर,
घर में पानी न आने पर,
(क्योंकि माँ हमेशा पानी भर के रखती है)
कही जाने के लिए पैकिंग करने पर,
(उनके सुझाव याद आते है)
आइसक्रीम खाने पर, खासकर कुल्फी,
(क्योंकि उन्हें बहुत पसंद है)
नींद न आये तो माँ की गोद,
(क्योंकि वो सर पर हाथ फेरकर सुलाती है)
बीमारी में खिचड़ी बनाते हुए,
गर्मी में तरबूज़ खाते हुए,
सर्दी में सूप पीते हुए,
और बारिश में पकोड़ों के लिए तरसते हुए,
कपडे तार से उतारते हुए,
गंदे तौलिये से हाथ पूछते हुए,
सुबह उठ कर बिस्तर संवारते हुए,
गन्दा रुमाल जेब में रखते हुए,
छुट्टी के दिन देर से नहाते हुए,
(क्योंकि इन सब के लिए बहुत डांट पड़ी है),
और आज Mother’s Day है,
आज तो भरपूर याद आएंगी ।







