यूं तो आटा और पानी दूर दूर रखा जाता है,
की कही आटा गिला न हो जाये
और कंगाली ले आये,
मतलब लड़का लड़की,
किसी गलत संगत में न् पड़ जाए,
पर जब पेट मे चूहें उधम मचाते है,
या प्यार का कीडा ‘lovebug’ काटता है,
फिर पानी आटे में धीरे धीरे मिलता,
लड़की को धीरे धीरे रिझाना पड़ता है,
इतनी आसानी से कहा मानती है भाइयो !
स्वाद के लिए नमक भी बुरका जाता है,
इन्हें माशूका के नखरे समझ लीजिये,
उसे गुथा जाता है,
जैसे प्यार की कशमकश, नोक झोंक है,
उसे बेलन से बेला जाता है,
मतलब अब प्यार परवान चढ़ने लगा है,
भले ही शादी के बाद बेलन का उपयोग बदल जाये,
पहले रोटियां गोल नही होती,
मोहब्बत में उतार चढ़ाव होते है,
इसलिए थोड़ा आटे का पलोथन भी लगाते है,
यानी कि तारीफ के पुल बंधकर, झूठे या सच्चे,
धीरे धीरे रोटी और प्यार को आकर देते है,
पलट पलट कर गरम तवे पर सेंका जाता है,
क्योंकि इश्क़ की तपिश दोनों तरफ बराबर है,
वो फूलती है,
यानी दोनों ही ख़ुशी में फुले नही समा रहे,
भले ही ये कविता कम,
और रोटी की विधि ज़्यादा लग रही है,
पर रोटी बनाने का एक एक कदम,
प्यार की recipe है,







