पर्दे

ये पर्दों से झाँकती हुई रोशनी से नफ़रत है मुझे
ये मेरे सुबह के मीठे नींद में खलल डालती है

जहाँ एक तरह कूकर की सिटी
और दूसरी तरफ
दूध वाले की घंटी
मेरे सपने में विघ्न पैदा करते है

तो मेरा पति भी अखबार के पन्नो की सरसराहट से
मेरे सपनों की विद्या बालन को मंजुलिका बना देता है
फिर कहते है की तुम पुरे दिन चिडचिडी क्यों रहती

न जाने सुबह सुबह देश और दुनिया का हाल जानकर ही
मोदी बनेंगे क्या
पजामा तो मिलता नहीं खुद से

बाहर जाने को बोलो तो
इतनी हवा करते है की
ट्रक के टायर भर जाये

उठ कर भी शांति कहाँ
जोर जोर से ब्रश करते है
कुल्ला तो ऐसे करेंगे की
सुनामी आ गयी हो

फिर बहार जाकर
अपने ही जैसे
किसी फालतू इंसान को फोन करेंगे
बत्तें सुन कर लगता है की
RBI Governor अब foreign policy भी बना सकते है
पर इनसे राय ले लेते तो शायद वो और अच्छा कर पाते

cook aunty भी इतनी aunty नहीं
जितना ये उनसे बातें करते है
पूरी सोसाइटी की खबर तो ऐसे रखेंगे
जैसे यहाँ की CBI हो
और इनके agent है
guard, electrician, plumber, रिक्शावाला, presswala
इतनी घनिष्ठता तो ख़ुद के भाई से नहीं है इनकी

ये सब के बाद ऐसे फालतू reel देखते है
की समझ आता है कितनी पढाई कर लो, अकल नहीं आती
मतलब ट्रक वाला की life में तुम्हे इतना interest क्यों
इस से तो किसी actress को follow कर लेते
कम से कम कुछ fashion sense तो आती

कभी कभी इनका आलसी शरीर हिल भी जाता है
exercise तो करते है पर
loud music में ही
जाने lean on सुने बिना workout नहीं हो सकता क्या

इतना शोर होने के बाद मुझे उठाना ही पड़ता है
फिर मैं परदे हटाती हूँ
ये सोचते हुए की
काश कोई पर्दे होते
जो रौशनी के साथ शोर भी रोक सकते

फिर कहते है अरे, तुम क्यों उठ गयी
शांति से सो जाओ
Sunday है
मैं तुम्हारे लिए special breakfast बना रहा हूँ

ये सुन कर तो मेरे होश फ़ाख्ता हो गए
ख़ुद को “रणवीर बरार” समझ कर
एक तो पता नहीं कौनसे देश की dish को
देसी तड़का मार देते है
फिर ज़बरदस्ती तारीफ़ करो
क्यूँकि फोटो खिचने के चक्कर में एक तो ठंडी हो जाती है
एक बात बताऊ – वो इतनी अच्छी होती नहीं, जितनी फोटो में दिखती है
बाद में , चुपके से , ब्रेड मलाई ही खानी पड़ती है,

फिर किचन तो पूछो मत
सारे बर्तन में कुछ न कुछ बना होता है
maid aunty भी कहती है
की sunday को extra payment किया करो
भैया बहुत बर्तन गंदा करते है

फिर लगता है की monday ही अच्छा है
सुबह office चले जाते है शांति से
बिना पर्दे हटाए

समोसे का दंभ

इठलाता हुआ
एक तरफ़ हरी
तो दूजी और लाल चटनी
लिए चलता है समोसा

उसे गुरूर है
की मुझे कौन हटा सकता है
सरकारी दफ़्तरो को मीटिंग
Evening snacks
बच्चों की birthday party
या सुबह के नाश्ते से
चाहे रिश्ता पक्का करना हो
या cocktail party
मैं तो हर तरफ़ हूँ
मेरे नाम पर तो kitty party भी चलती है – समोसा किटी

तभी तो नौक निकल कर
अपने किनारे पैने करके रहता है
मौके के हिसाब से छोटा बड़ा हो जाता है
जगह और season के हिसाब से ख़ुद को एडजस्ट भी कर लेता है
आलू तो है ही
सर्दियो में गोभी या मटर
Lavish करना हो तो काजू किशमिश या पनीर
या south में जाओ तो राइ करिपटा
और तो और non-veg में कीमा का भी बन जाता है
health conscious लोगो के लिए
Baked समोसा भी आने लगा है
इस versatility को कौन टक्कर दे पाएगा

हुए थे कुछ खड़े
जैसे की
ढोकला – खाते हुए तो पानी गिरने लगता है
Patties – आधी पापड़ी बिखरी पड़ी रहती है,
जैसे किसी छोटे बच्चे ने खाया हो,
शोभा देता इस तरह खाना

कचौड़ी थोड़ी टिक पायी
पर बिना आलू की सब्ज़ी के
वो जल बिन मछली लगती है
पकौड़ी ने भी काफ़ी मशक्कत करी
पर वो अपनी variety में ही उलझ कर रह गए
की आलू का मंगाये या गोभी का या प्याज का या ब्रेड का
अब वड़ा पाव भी आ रहा है टक्कर में
पर जितने में उसका वड़ा बनेगा
उतने में मैं पूरा बन जाऊँगा
और पाव में fit हो जाऊ

विदेश से भी कुछ लोग आए थे competition देने
Burger, sandwich जैसे
तो उनका बन-समोसा
और समोसा-सैंडविच बना दिया 😈

इंसान कुछ भी experiment कर ले
घूम फिर के समोसे में पास ही आ जाता है
इतनी सहूलियत कोई भी नहीं दे पाता न
और इसके साथ अदरक वाली चाय हो जाए
तो स्वाद में चार चाँद लग जाए

पर क्या अजूबा बनाया है ये
तिकोना सा
पूर्वोत्तर में जिसे सिंघाड़ा भी बोलते है
जैसे कोई लाला मुंह फुलाये बैठा हो

Butterflies

पहला दिन था कॉलेज का
बस रैगिंग से बचना था
पर एक लड़की ने पकड़ लिया
बोली – fresher
I said – yes
बोली- ओह फ़च्चे , चल मेरा बैग उठा कर हॉस्टल रख
पेट में हुई गुड गुड पर चुपचाप मैंने बैग दिया पटक

अगले दिन वो लड़की मेरे सेक्शन में yes mam बोली
तो मैंने उससे निगाहे मिलायी
उसने एक guilty स्माइल दे कर नज़रे हटायी
मैं भी चुप रहा
batchmate से ragging, ये अपमान मन में दबा लिया

फिर एक दिन उसके बराबर में सीट मिली
तो अपनी curiosity को हवा दी
तुमने मुझसे बैग क्यों उठवाया
बोली तुम सीधे लगे तो बस फ़ायदा उठाया
I said – u need to pay for it
She said – will you have Maggi
फिर कैंटीन गए और मैगी खायी
तो थोड़ा कुली की फीलिंग आई
पर पेट मे थोड़ी butterfly भी उड़ी

फिर ये पहचान दोस्ती में बदली
क्यूंकि हमारे हॉस्टल भी थे पड़ोसी
In today’s term
Our nanoship became friendship

बाबा मोहनीश बहल के अनुसार
लड़का लड़की न रह पाए दोस्त फिर एक बार
पहले situationship हुई
यानी awkwardness की बोले की नहीं

एक दोस्त ने मुझे चढ़ा दिया
तो मैंने propose करने का ठान लिया
लगाया perfume उधार का
बनवाया एक गुलदस्ता प्यार का
गये फिर एक सुंदर सा cafe
पेट में butterfly लगी उड़ने
फिर वो आई सामने
गुलदस्ता पेश किया हमने
जैसे ही लगा कुछ बोलने
निकली बस कुछ हवा ही मुंह से
जैसे सारी butterfly
पेट से निकल कर बाहर आ गई

वो मेरे माथे पर पसीना
और हाथ का कपकपना
देख कर समझ गई
मुस्कुराई
और बोली – you are too cute
मुझे समझ नहीं आया
(मुझे लगा हँसी और पटी)
पर फिर भी मैंने फिर ज़ोर लगाया
I like you , will you be my girlfriend?
वो फिर मुस्कुराई और बोली – finally you asked
और हंस पड़ी
हमने officially hug किया
रिश्ते को अब relationship पर promote किया
(भले ही Benching, breadcrumbing साथ में चलता रहा)
पर अब भी वो जब साथ होती है
पेट में butterfly थोड़ी गुदगुदी तो करती है…

ननिहाल

रात को नींद ही नही आयी
क्यूंकि आज नानी के घर जाना है
वो भी एक महीने के लिए
मम्मी इतनी सारी books रख ली
मैंने सोचा मम्मी कुछ ज़्यादा ही आशावादी है
की हम वहाँ पढ़ेंगे
मैं तो बस वह जाकर सबके साथ खेलने के लिए बैचैन हूँ

मामा आये है लेने
मैंने साइकिल रखने की ज़िद की
बोले जगह नहीं है
मुझे MRF and के बैट का लालच देकर बैठाया गया

दादा दादी को मिस करूँगा पर
और चाचा को भी
पापा को भी मिस करूँगा
पर वो पता नहीं क्यों
ख़ुश लग रहे थे हमारे जाने से

रास्ते में मम्मी ने चाय पी
इतनी गर्मी में पता नहीं कैसे पीते है
मैंने तो बस चुस्की खायी, ऑरेंज वाली

जैसे ही घर पहुँचे
नानाजी आ गए लेने
उन्होंने उतरते ही हमे चॉकलेट दी
और नानी ने आते ही खिलाना शुरू कर दिया
वो मस्त हलवा बनाती है

फिर मैं अन्नू , पिंकी और चिंटू से मिला
दिन में हम contra-mario खेलतें था
और शाम में क्रिकेट
मुझे हमेशा fielding मिलती थी
जब MRF का बैट आयेगा तो पहली batting करूँगा

मौसी हमे दिन में पढ़ती थी
पूरा holiday homework करा दिया
(क्यूंकि मोबाइल नहीं था, तो फ्री ही रहती थी लड़किया)
उनकी अजीब शर्त थी
की हमारी चोटी बना कर ही पढ़ती थी
हर बार नया style
(अब लगता है हम जाने कौनसा project थे)

एक दिन शाम में हमने pool भरने का plan बनाया
एक जगह से फटा था
हमने उसको टेप से चिपका कर भरा
और उसे भर कर कूदने लगे
चिंटू ने ऐसी jump मारी
की वो फैट गया
और पानी पूरे घर में घुस गया
पानी अंदर और सब लोग घर से बाहर
आजकल तो ऐसे resort में ही होता है
Disaster management जैसी situation हो गई थी
डाँट पड़ती रही पर
हमने तो बस puppy face बनाये रखा

हमे घर में नज़रबंद किया गया
एक दिन मठी के साथ आचार खाने का मन किया
तो बरनी से निकालने लगे
इतना तेल था की बरनी हाथ से फिसल गई
और चकनाचूर ही गई
(जैसे किसी आशिक़ का दिल टूटा हो)
फिर डाँट पड़ी

फिर हमने ludo, carrom के लिए partner मांगे
हमारी energy देखकर
उन्होंने फिर से बाहर भेज दिया

इसी तरह छुट्टियाँ कट गई
आख़िरी में पापा हमे लेने आए
तो काफ़ी अच्छा खाना बनाया नानी ने
मैंने पूछा हमारे लिए क्यों नी बनती ये सब
बोली तेरी शादी होगी तो अपनी ससुराल में बनवाना
फिर मैंने सोच लिया बड़े होते ही शादी करूँगा

तूफ़ान

तूफान वायु के वेग में ही नहीं होता
ये होता है लक्ष्य ताकती आँखो में

जैसे एक खिलाड़ी
जिसने olympic में gold medal लाने की ठान ली हो
तूफ़ान उसके पसीने से सनी बनियान में है
body cramps से लाल हुए शरीर में है
volini spray की ख़ाली बोतलों में है

या एक सिपाही के देशभक्ति के जज़्बे में
जो पहाड़ी को अंधेरे में चढ़कर दुश्मन को मारने चला हो
तूफ़ान उसके रिसते घावों में है
जिसे वो नज़रंदाज़ कर आगे बढ़े चला जा रहा है
उन गोलियों के भार में है
जो उसने खाने की जगह रखी है

या एक विद्यार्थी की मेज़ कुर्सी में
जिसने कोई entrance exam निकालने का दम लिया हो
तूफ़ान उसकी भरी हुई कापियों में है
किताबों के इमारतों में है
और ख़त्म हुई pen की refill के ढेर में है

या एक entrepreneur की सादगी में
जिसने अपने वापस जाने के सारे रास्ते बंद कर
खुद को पूरी तरह business में झोंक दिया हो
तूफ़ान उसके और उसके परिवार की खर्चो की कटौती में है
उसके स्वाभिमान की चोट में है ,
जो दफ़्तर खोल ज़मीन पर पौछा मार कर ,
पालथी मार कर काम कर रही है

या एक लड़की के weight loss goal में
जिसे मोटी कह कर लड़के वालो में reject किया हो
तूफ़ान मन मार कर रोज़ gym जाने में है
मिठाई और बर्गर देखकर भी protein shake पीने में है
उस pencil skirt को देखती ललचाती आँखो में है

तूफ़ान रोज तड़के उठने में है
एक ही routine दोहराने में है, discipline में है
नींद से भारी आँखो में भरे अधूरे सपनों में है
शौक और ज़ुबान की ललक को क़ाबू करने में है
परिवार और दोस्ती की नाराज़गी मौल लेने में है
Sunday और Monday का फ़रक भूलने में है
दिवाली होली ईद जैसे त्योहार को नज़रअंदाज कर
तूफ़ान लक्ष्य प्राप्ति करने के सुकून में है

ये तूफ़ान ऐसे ही नहीं दिखता
ये महसूस किया जा सकता है
एक दृढ़ निश्चय के जुनून में
ये वो भभकती हुई ज्वाला है
जो किसी भी अग्नि शमन से बुझाई नहीं जा सकती
ये एक आम से दिखने वाले इंसान की चुप्पी में है
ये ख्वाबों को हकीकत में बदलने के पागलपन में है

तूफान वायु के वेग में ही नहीं…
ये होता है लक्ष्य ताकती आँखो में है…

इश्क़ है या dinosaur

क्या भाई
कौन हो तुम
कैसे दिखते हो
कहाँ मिलते हो
कहाँ पाए जाते हो
सुना बहुत है तुम्हारे बारे में
पर कभी देखा नहीं

न जाने कितने लोग ने अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर दी
और न जाने कितनों ने आबाद (अपनी जेब भरकर)
पर कोई बता नहीं पाया की तुम मिलोगे कहाँ

लोग भागते चले जा रहे है तुम्हें ढूँढते हुए
कभी फूलो की दुकान पर
तरह तरह के कैफ़े – restaurant पर
मंगलवार को मंदिरों में
आज कल bumble-tinder पर

सड़को पर बाइक घुमा घूमा कर
petrol ख़त्म कर दिया Dubai का
उसे अब tourist spot बनना पड़ा

इतने मे तो सरकारी नौकरी मिल जाती
पर तु न मिल रहा

मैंने भी ढूंढा, कहनी, किस्सो में
गानो में, फ़िल्मों में
कॉलेज की कैंटीन में
लाल क़िले की दीवारों पर
व्हिस्की की बॉटल में
और सुसाइड पॉइंट पर
पर कही भी इसके अवशेष न मिले
थोड़ी अश्लीलता ज़रूर नज़र आई

इतिहास की किताबो में भी इसका उल्लेख है
कुछ लड़ाइयाँ भी हुई
पर दिखता कैसा है इसका कोई विवरण नहीं
आज कल भी सुना murder , honour killings हो जाती है

पर ये नामाकूल मिलेगा कहाँ
कोई तो बताए
किसी से पूछो तो कहता है
इश्क़ मुकम्मल नहीं होता
ये अधूरा ही रहता है
ख्वाबो, खयालों और यादों में
कहता है इंसान मर जाता है
पर इश्क़ ज़िंदा रहता हूँ
बताओ ये भी कोई बात हुई

मैंने कहा किसी ने कोई फोटो तो बनाई होगी
जैसे राजा रवि वर्मा ने भगवान राम की कल्पना की थी
बोला पागल है क्या

अरे फोटो तो लुप्त हुए है dinosaur की भी बन जाते है
Spielberg ने तो उस पर 3-4 फ़िल्में बना डाली
ये इश्क़ पता नहीं कौन सा अफ़लातून है

Newton को gravity मिल गई
पर किसी को यहाँ इश्क़ न मिला
शायद वो dinosaur इश्क़ करते थे
इसलिए लुप्त हो गए !

मासूम से मोहब्बत

क्या दिन थे वो
जब छोटे थे
मोहब्बत क्या होती है
क्या पता था
पर हो जाती है
ये भी नहीं पता था

कोई क्यूँ अचानक से अच्छा लगने लगता था
उसकी एक झलक के लिए घंटे भी पलों में गुजरते थे
कभी खिड़की से झांकते
कभी नुक्कड़ पर खड़े रहते
छत के चक्कर काटते
पड़ोस में जो रहने आयी थी वो

फिर उसने मेरे स्कूल में ही दाखिला लिया
सेक्शन अलग था
इसलिए उस क्लासरूम के भी चक्कर लगने लगे
उसकी क्लास के लड़के दोस्त बन गए
उसकी नज़र में आने की कोशिश में टिफिन वहीं खुलता था
इंटरवल में
उसकी डेस्क के आसपास
यूँ ही चक्कर कटता था
पानी की टंकी पर उसके इंतज़ार में
न जाने कितनी बोतले भरवा दीं
पर दिल नहीं भरता था

कोशिश यही रहती थी कि उसकी साथ निकलूँ
और उसके साथ ही साइकिल चला कर वापस आऊँ
यूँ मन करता था कि उसकी नज़र में अच्छा हो जाऊँ
अब पढ़ने का भी मन करने लगा था
क्योंकि वो पढ़ाई में अच्छी थी
क्रिकेट में भी कम और
बैडमिंटन में ज्यादा मन लगता था

उसकी मुस्कुराहट से बनता था दिन
और आंसुओ से दिल दहल जाता था
ऐसे ही स्कूल निकल गया
उसके आसपास मंडराते हुए

कॉलेज की छुट्टियों में
वो आती थी
तो मन फिर से हिलोरे मारने लगता था
ऐसा अटक गया था
कि कोई अप्सरा भी ये तपस्या न भंग कर पाती

बातचीत होती रही
पर भावनाओं को अभिव्यक्ति और
प्रेम को प्रत्यक्ष रूप न दे पाया

उससे प्रेरित होकर
काबिल हो गया हूं
सोचा मैं कुछ तो बन गया
तो मोहब्बत को आगे बढ़ाऊं

पर वो आगे बढ़ चुकी थी
उसे उसकी मोहब्बत मिल चुकी थी
झटका तो लगा
पर मन मसोसने वाली क्या बात थी
उसने जिसे चुना होगा
वो भी लाखों में कोई नगीना होगा

उसकी पसंद है
इसलिए ज़िद नहीं
नहीं तो हिटलर, मुसोलिनी, स्टालिन
मिला कर विश्वयुद्ध की झड़ियां लगा देता

और मोहब्बत है न
तो ज़िद कैसी
हासिल करना ही मकसद थोड़े है,
मोहब्बत तो ज़िंदाबाद थी,
ज़िंदाबाद है और,
ज़िंदाबाद रहेगी

उसकी यादों का झुरमुट
मेरी हर सांस में है
मेरी सफलता ही मोहब्बत है
मैं खुशनसीब हूं
की मोहब्बत के लायक बन पाया

ताज महल

आहिस्ते आहिस्ते थी कदमताल
धड़काने तेज थी
झुकी हुई थी पलके

उस बड़े से दरवाज़े से निकलते हुए
जिसके दोनों तरफ़ ११ मीनारे है
जो बताता है की २२ साल में ये इमारत बनी
ऐसा मुझे guide ने बताया

मन उत्सुक था
पर गाइड के कहने पर
Stage के curtain की तरह
मैंने पलके धीरे धीरे उठाई

तो ये आँखे निहाल हुई
देखकर मोहब्बत के मुजस्समें को
ऐसा लगा
साँसे थम सी गई
और समय ठहर सा गया हो

वो खूबसूरती बहुत ज़्यादा थी
इन छोटी छोटी आँखों के लिए
सफेद संगमरमर की
इस हसीन कलाकृति को
एक साथ समेटने के लिए

यकीन नहीं हुआ कुछ देर तो
की कैसे है ये इतना बेमिसाल
तारीफ़े और शब्द जो सुने थे
वो कम लगे
उस मंज़र को बयान करने के लिए

सफ़ेद चबूतरे पर वो ऐसे रखा था
जैसे ऊपर से कोई सहेज गया हो
इंसान कैसे कर सकता है ऐसी कल्पना
ख्वाबो में भी देखना नमुमकिन सा लगे

पता नहीं
उस पर चढ़ कर क्या ही मिल रहा है इंसान को
मैं तो उसकी पहली झलक से ही उबर नहीं पा रहा हूँ

सुना है
वो हर पहर में रंग बदलता है अपने
क्या ही
क़हर ढाता होगा वो अपने हर रूप में

जब पूर्णिमा की चाँदनी उस पर पड़ती होगी
न जाने कितना चमकता होगा
चुँधिया जाती हो आँखे
कैसे कोई ख़ुद को संभालता होगा

मैं तो बस उसे सूरज की रोशनी में देख पाया
सुबह वाली खिलती हुई मीठी धूप में
जैसे वो धूप से आलिंगन कर रहा हो

या दिन की तेज वाली
जिसमे वो धूप के साथ मुक़ाबला कर रहा हो
की कौन ज़्यादा चमकेगा

और शाम की ढलती हुई
की धूप थक कर जा रही हो
ये कहते हुए
कि कल तुझे हरा दूँगी

मैंने उसे नदी पार कर
महताब बाग की तरफ़ से भी देखा
की कहा से ज़्यादा ख़ूबसूरत दिखता है

पर जहाँ से भी देखू
उसकी ख़ूबसूरती नया रूप ले लेती है

जैसे miss world हो
जो हर costume में फबती है

अविश्वसनीय, अविस्मरणीय, अद्भुत है ये ताज महल
मुझे अब UNESCO पर विश्वास होने लगा है
की उसने इसको अजूबा सही बनाया
ये सारी organisation ग़लत नहीं

क्या करूँ…

किसी में सही कहा था
जुदाई में मोहब्बत लावारिस हो जाती है
वो बिना साहिल के भटकती हुई
कहीं पनाह ढूँढती है
उसे नहीं पता कहा जाना है

ये मोबाइल बेजान हो जाता है
इसी के बहाने वो मेरे करीब थी
कभी Snapchat की streak
तो कही insta reel
या रात भर चलने वाली video call

अब ये cafe-clubs बंद भी हो जाए तो हमे क्या
और बंद ही हो जाए तो अच्छा है
नहीं तो ख्याल आता है की उसको यहाँ ले जाते
ये coffee पिलाते
उसे avocado toast बहुत पसंद थे

खाने में भी कोई स्वाद नहीं आता
क्यूंकि स्वाद तो उसके साथ का था
मीठा हो या नमकीन
सब खट्टा और कड़वा ही लगता है

अब रात में सोने के अलावा कोई चारा नहीं
पर कुछ ख़ास अंतर नहीं
जागो तो उसकी याद आती है
और आँखे बंद करो तो उसके ही सपने

उसकी गली के सामने से गुज़रता हूँ
तो रोंगटों में सिहरन होती है
जैसे उसकी ख़ुशबू मेरे रोम को छूकर निकली हो
रोकता हूँ ख़ुद को बस कैसे ही
उस की गली में जाने से

कैसे मिलू उन दोस्तों से
जो उसके साथ रहने लिए
दूर हों गए थे
कैसे बनाऊ अब नए रिश्ते
क्यूंकि पुराने तो उसके लिए छोड़ दिए थे

ये तोहफ़े जो उसने दिए थे
अब एक अधूरी मोहब्बत की स्मारक भर है
उसका समान कुछ पड़ा है
सहेज लू या जला दु, अजीब कश्मकश है
पर अपने अंदर उसकी यादों का क्या करु
जो दिन के हर पहर
साल के हर मौसम से जुड़ी है

क्या करूँ मैं अब ख़ाली समय का
क्यूँकि हर पल उसका था
इस ख़ाली दिमाग़ का
जो सिर्फ़ उसने बारे में सोचता था
और इस दिल का
जो सिर्फ़ उसके लिए धड़कता है

ये मोहब्बत की कविताएँ
सरासर झूठी लगती है
कहा होती है इतनी मोहब्बत
मैंने तो की थी पर
मुझे तो मायूसी ही हाथ लगी

गाजर का हलवा

घने कोहरे को भेदते हुए
मीठी सी धूप झाँकती है
इस चिलचिलाती ठंड में
कुछ मीठा खाने की दरकार होती है

तभी सब्ज़ी के ठेले पर
पालक, मेथी, बथुआ के हरे पत्तो के बीच
लाल गाजर जब दिखती है
तो मन में बस हलवे की ही तस्वीर बनती है

पर गाजर से हलवे तक का सफ़र आसान नहीं होता
मम्मी सबको काम पर लगा देती है
पहले मैं और भैया गाजर धोकर साफ़ करते है
फिर सब ladies मिलकर उसकी छीलती है
और gents उसको घिस कर लच्छे बनाते है
चारो तरफ़ लालिमा छा जाती है
जैसे ये दूब गेरुआ हो चली हो

हम तो इतने में ही थक जाते है
पर अभी तो मेन काम बाकी रहता है

वो लच्छा पता नहीं कितनी देर तक पकता है
कभी दूध, फिर मावा या milkmaid,
मेवा, मीठा,
फिर भुनाई,
जो घंटों तक चलती है
फिर मम्मी ऐसे भुनती है
जैसे मेरी और भैया की पिटाई कर रही हो

भून भून कर वो light red से dark red हो जाता है
(Lipstick लगाने वाले तो समझ ही गए होंगे)
मुझे तो दया ही आ जाती है
बेचारी गाजर के साथ क्या हो गया…

इतनी जद्दोजहद के बाद
सुबह से शाम होने के बाद
इतने लोगो के कड़े परिश्रम के बाद
मम्मी के cervical के pain के बाद

जब वो हलवा तश्तरी में सजा आता है
जिस पर मोती की तरह काजू बिखरे पड़े होते है
जीव्हालोलुप हो आँखें उसे चारो तरफ़ से घूरती है
और उसके एक कौर के जिह्वा से मिलन होने पर
जो तृप्ति इस मन को मिलती है
वो अतुलनीय, अविस्मरणीय, अप्रत्याशित, अभूतपूर्व है
दिव्य है !
जैसे देवो ने धरती पर उतर कर
ख़ुद कढ़ाई चला के परोसा दिया हो !